शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अलग-अलग अभियानों के जरिए करोड़ों का बजट खपाया जा रहा है, लेकिन न तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार दिख रहा है और न ही आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पा चुके बच्चों की सुध ली जा रही है। जिले में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले 818 बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। शासन स्तर से निजी स्कूलों का 25 करोड़ 97 लाख रुपये का बजट भी लंबे समय से लटका हुआ है।
ऊधमसिंह नगर जिले में वर्तमान में 548 विद्यालयों में आरटीई की सुविधा मिल रही है। इसके बावजूद जरूरतमंद बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। पब्लिक स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होने के बावजूद सरकारी उपेक्षा से बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ रहे हैं। अब तक पंजीकृत 32 हजार 593 बच्चों में से 818 बच्चे आरटीई के तहत अच्छे स्कूलों में दाखिला होने के बावजूद पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। काशीपुर और जसपुर ब्लॉक में बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।
हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी इसकी वजह दूसरी बताते हैं। उनका कहना है कि जिन बच्चों का पंजीकरण कक्षा पांच तक के विद्यालयों में होता है उन्हें छठी में सरकारी विद्यालय में पढ़ने का नियम है। इसे बीच में पढ़ाई छोड़ना नहीं कह सकते हैं। दूसरी तरफ यह भी है कि आरटीई के तहत निशुल्क शिक्षा देने वाले विद्यालयों को वर्ष 2016-17 का 25 करोड़ 97 लाख रुपये प्रतिपूर्ति शुल्क नहीं मिला है। जिले में सातों ब्लॉक में यही स्थिति है। यही कारण है कि निजी विद्यालय आरटीई के तहत बच्चों को पढ़ाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। वह कोई न कोई बहाना कर नए प्रवेश से कन्नी काट रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी बजट के शासन को पत्र लिखने के बावजूद अवमुक्त न होने की बात कह रहे हैं।
वर्ष 2012 से भर्ती बेसिक शिक्षक एसआईटी के रडार में
ऊधम सिंह नगर जिले में 792 प्राथमिक और 202 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। डीएलएड व ब्रिज कोर्स को लेकर चल रहे विवाद के चलते शिक्षक और सरकार आमने-सामने नजर आ रहे हैं। इससे प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। पिछले दिनों ब्रिज कोर्स के विरोध में शिक्षकों के देहरादून कूच करने से जिले के अधिकांश विद्यालय बंद रहे। ब्रिज कोर्स को लेकर स्थिति सामान्य न होने तक प्राथमिक विद्यालयों में आये दिन इस तरह की घटनाक्रम होते रहने की आशंका है।
जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों से नियुक्ति पाने वाले शिक्षक एसआईटी की रडार में हैं। वर्ष 2012 से नियुक्ति सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की लगातार जांच हो रही है। बीते नवंबर में शिक्षा विभाग ने गदरपुर के जूनियर विद्यालय के अध्यापक को फर्जी दस्तावेजों से नियुक्ति पाने पर बर्खास्त भी कर दिया था। इससे पूर्व 15 अन्य शिक्षक भी फर्जी प्रमाणपत्रों से भर्ती होने में बर्खास्त हो चुके हैं। शिक्षा में इन गड़बडिय़ों से नौनिहालों का भविष्य चौपट हो रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक रवि मेहता कहते हैं वर्ष 2012 के बाद नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।