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Udham Singh Nagar News: जिले में हेपेटाइटिस बी व सी के 706 मरीज सक्रिय

Thu, 27 Jul 2023 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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डॉ. राजेश आर्या
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हेपेटाइटिस के इलाज के लिए जिला अस्पताल में दवाइयां और इंजेक्शन हैं उपलब्ध
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रुद्रपुर। जिले में हेपेटाइटिस के कुल 706 मरीज सक्रिय हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी के 151 व सी के 555 मरीज हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, लिवर की इस गंभीर बीमारी के इलाज के लिए जिला अस्पताल में दवाइयां और इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
हेपेटाइटिस के वायरस पांच प्रकार के ए,बी,सी,डी व ई होते हैं। इनमें बी व सी वायरस सबसे अधिक घातक हैं। इनसे लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित व्यक्ति के दूषित रक्त , नेल कटर और रेजर आदि से यह संक्रमण फैलता है। इसके अलावा नशीली दवाओं के इंजेक्शन के आदान प्रदान, मां से बच्चे को और असुरक्षित कान छिदवाने से भी इन बीमारियों के संक्रमण का खतरा रहता है। कई बार सक्रमितों में इसके लक्षण दिखाई नहीं पड़ते। इसके प्रमुख लक्षणों में मांसपेसियों में दर्द, त्वचा और आंखों में पीलापन, भूख न लगना आदि होते हैं।
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हेपेटाइटिस बी व सी से बचाव
- हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के लिए टीका लगवाएं।
- शराब व तंबाकू का सेवन न करें।
- तैलीय भोजन करने से बचें।
- डिब्बाबंद भोजन,केके व चॉकलेट आदि से दूरी बनाएं।
-पौष्टिक भोजन लें।
कोट
जिले के अधिकतर अस्पतालों में हेपेटाइटिस बी व सी से बचाव को लेकर दवाइयां व इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इस बीमारी में सबसे अधिक लिवर प्रभावित होता है।- डॉ. राजेश आर्या, एसीएमओ।
काला पीलिया से ग्रसित गर्भवतियां हो रहीं रेफर
काशीपुर। सरकारी अस्पताल में अलग प्रसव कक्ष नहीं होने पर हेपेटाइटिस बी (काला पीलिया) से ग्रसित गर्भवतियों को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। हर महीने तीन-चार गर्भवतियां इसकी चपेट में आ रही हैं।
एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल में एक ऑपरेशन थिएटर और एक प्रसव कक्ष है। काला पीलिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित महिलाओं के प्रसव के लिए अस्पताल में अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। समय से पूर्व आने वाली गर्भवतियों को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। महिला रोग विशेषज्ञ अल्पना मिश्रा बताती हैं कि ओपीडी में पहुंचने वाली गर्भवतियों की जांच कराने पर 7-8 गर्भवती महिलाएं काला पीलिया से ग्रसित पायी जा रही है। अस्पताल में व्यवस्था नहीं होने पर एहतियात बरतने के साथ उन्हें हल्द्वानी में प्रसव कराने की सलाह दी जा रही है। डॉ. अमरजीत सिंह साहनी ने बताया कि महीने तीन-चार मरीज में काला पीलिया पाया जा रहा है।
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कोट
एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल में एक ही ओटी और एक ही प्रसव कक्ष है। काला पीलिया से ग्रसित महिला का प्रसव करने में इंफेक्शन फैलने का खतरा रहता है। अस्पताल सीएमएस से वार्ता कर अलग से प्रसव कक्ष की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. विनीता शाह, महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तराखंड देहरादून
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