नजूल जमीनों को फ्रीहोल्ड करने के शासनादेश को निरस्त करने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिले के 1385 परिवारों का 65 करोड़ रुपया फंस गया है। यह पैसा आवेदकों ने अपनी जमीन को फ्रीहोल्ड कराने के एवज में जमा किया था। उधर, 1385 आवेदकों की फ्रीहोल्ड की फाइल अब भी लंबित है।
प्रदेश सरकार ने 15 फरवरी को कैबिनेट बैठक में नजूल जमीन को फ्रीहोल्ड करने को मंजूरी दी थी। साथ ही इसका शासनादेश जारी किया था। नीति आने के बाद जिले में पुराने और नए 2486 आवेदन प्राप्त हुए। इसके बाद कमेटी ने 1101 आवेदकों की जमीन को फ्रीहोल्ड कर दिया, जबकि 1385 आवेदकों की फ्रीहोल्ड की प्रक्रिया अभी चल रही थी। इसके एवज में इन आवेदकों ने 65 करोड़ रुपया जमा कराया था। अब भी आवेदन मिल रहे थे, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद इन आवेदकों के पैसे फंस गए हैं।
जिले में करीब 2000 एकड़ जमीन नजूल की
रुद्रपुर। जिले में करीब दो हजार एकड़ जमीन नजूल की है। यह जमीन सरकार की ओर से लोगों को लीज में दी गई थी। अब इसमें लोगों का कब्जा है। इसमें कई छोटे परिवार तो कई बड़े फार्म वाले भी हैं।
जिले में 1952 का नोटिफाइड एरिया पूरा नजूल
जिला प्रशासन के अनुसार जिले में 1952 के बाद का नोटिफाइड एरिया पूरा नजूल है। इसमें से सबसे अधिक 1989 एकड़ जमीन तो रुद्रपुर में ही है। इस हिसाब से रुद्रपुर शहर की 80 प्रतिशत आबादी नजूल भूमि में काबिज है।
जिले के 23256 परिवार नजूल भूमि पर बसे हैं
जिले के करीब 23256 परिवार नजूल भूमि पर बसे हैं। कोर्ट के फैसले के बाद इन परिवारों का फ्रीहोल्ड का सपना टूट गया है। उधर, आवेदकों को अपनी पैसों की चिंता भी सताने लगी है।
रुद्रपुर शहर में सबसे अधिक परिवार नजूल में
रुद्रपुर शहर में रम्पुरा, भदईपुरा, भूतबंगला, बाजार क्षेत्र, ट्रांजिट कैंप सहित निगम क्षेत्र की कई कॉलोनियां नजूल भूमि पर बसी हैं। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से करीब 16 हजार परिवार रुद्रपुर नगर निगम क्षेत्र में नजूल भूमि पर बसे हैं।