उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस के बाद भी जिले के करीब 60 हॉस्पिटल और नर्सिंग होम ने एनओसी नहीं ली है। बोर्ड के ऑनलाइन साफ्टवेयर में भी तकनीकी खराबी होने की वजह से आवेदन अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। अधिकारी एनओसी नहीं लेने वाले नर्सिंग होम को आवेदन के लिए और समय देने की बात कह रहे हैं।
दरअसल जैव चिकित्सा अपशिष्ट के उल्लंघन पर प्रदूषण बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। जिले में 132 नर्सिंग होम और सरकारी अस्पतालों को एनओसी लेने के लिए नोटिस जारी किए थे। अस्पतालों से कहा गया था कि उनके संस्थान तय मानकों का समुचित पालन नहीं कर रहे हैं। जिससे पर्यावरण प्रदूषण की संभावना स्वाभाविक है। जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है। खुले में कूड़ा जलाने और मानकों के अनुसार जैविक अपशिष्ट का निस्तारण नहीं करने पर बोर्ड ने एक अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज करने की कार्यवाही की थी। बोर्ड के नोटिस जारी होने के बाद 72 अस्पतालों ने आवेदन कर एनओसी ले ली थी।
लेकिन 60 अस्पतालों ने अभी भी एनओसी नहीं ली है। इनमें खटीमा, किच्छा, रुद्रपुर, सितारगंज के 19 और काशीपुर, बाजपुर, जसपुर, गदरपुर के 41 अस्पताल शामिल हैं। दिलचस्प बात है कि कई सरकारी अस्पतालों ने भी अभी तक एनओसी नहीं ली है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी एसपी सिंह कहते हैं कि 60 में से कुछ नर्सिंग होम ने आवेदन किया हुआ है। लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय से साफ्टवेयर में परेशानी की वजह से आवेदन अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। आवेदन करने के लिए नर्सिंग होम को कुछ और मोहलत दी गई है। एनओसी नहीं लेने वाले नर्सिंग होम से जुर्माना या कोर्ट में मुकदमा दर्ज करने की कार्यवाही होगी।