जिले की तीन विधानसभाओं में पांच नदियों से 47 गांव प्रभावित हैं। इन गांवों पर बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य न होने से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। सिंचाई खंड ने गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए 110 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की। जिसे टीएसी ने तो हरी झंडी दे दी, लेकिन शासन से धन न मिलने के कारण यह गांव तीन साल से नदियों की बाढ़ का दंश झेल रहे हैं।
जिले में बाढ़ की दृष्टि से सितारगंज, नानकमत्ता और खटीमा विधानसभा क्षेत्र अतिसंवेदनशील मानी जाती है। तीनों विधानसभाएं बैगुल और नानकसागर जलाशयों और उनसे निकली नदियों से घिरी हैं। हर साल यहां बरसात में नदियों के कटाव से तबाही मचती है।
चार साल पहले सिंचाई खंड ने करीब 47 गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए सुरक्षात्मक कार्यों की कार्य योजना तैयार कर उत्तराखंड राज्य तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) को लगभग 110 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे थे। 2014-15 में टीएसी ने इसे स्वीकृत भी कर दिया लेकिन केंद्र और राज्य सरकार से धन आवंटन न होने के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
सिंचाई खंड की ओर से इन योजनाओं स्वीकृत कराने के लिए पुन: प्रस्ताव बनाकर भेजे जा रहे हैं। बरसात आरंभ होने में डेढ़ माह का समय रह गया है। अगर इस बार भी प्रस्ताव पर कार्यवाही न हुई तो बाढ़ का कहर कभी भी नुकसान पहुंचा सकता है।
सितारगंज की प्रमुख नदियां और प्रभावित गांव।
- बैगुल/सूखी नदी
राजनगर, कोटाफार्म, झाड़ी नंबर नौ, बमनपुरी, ठाकुरनगर, भक्तिनगर, गोविंदनगर, निर्मलनगर, जयंतनगर।
- कैलाश नदी
उकरौली, नकुलिया, खैराना, कौंधाअसरफ, कौंधारतन, कैलाशपुरी, औदली, सलमती, सलमता, रसोइयापुर, डोहरी, पथरियाफार्म।
दोनों नदियों से प्रभावित इन गांवों में 57 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा कार्य प्रस्तावित।
नानकमत्ता की प्रमुख नदियां और प्रभावित गांव।
- देवहा नदी
टुकड़ी, बिचुवा, भूड़झाला, मोहम्मदगंज, खमरिया, मेहरबाननगर, उलानी, सुनपहर, मोहम्मदपुर, भुडिय़ा, मजगमी व दाह ढाकी।
- कामन नदी
दीया, गांगी, गिधौर।
दोनों नदियों से प्रभावित गांवों में 38 करोड़ के कार्य प्रस्तावित।
खटीमा की प्रमुख नदियां और प्रभावित गांव।
-परवीन नदी
पुरनापुर, बेटीघाट, प्रतापपुर, नौसर, बंडिया, भगचुरी, जादोपुर, सुनपहर, मजगमी, दाहढाकी।
परवीन नदी और प्रभावित गांवों में 15 करोड़ के काम प्रस्तावित।
बाढ़ से बच सकेंगे डैमपार के पांच गांव
सितारगंज। सिंचाई खंड ने इस बार नानकसागर डैमपार के पांच गांवों को बाढ़ बचाने के लिए सुरक्षा कार्य करना शुरू कर दिया है। विभाग के अनुसार ऐंचता, विही, देवीपुर, चेतुआखेड़ा व ज्ञानपुर गौढ़ी में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। जो बरसात से पहले पूरे हो जाएंगे।
गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए शासन को पहले ही 110 करोड़ की कार्ययोजना भेजी गई थी। जिसे टीएसी से स्वीकृति भी मिल गई। धन आवंटित न होने से यह योजना पूरी नहीं हो सकी। अब पुन: शासन को प्रस्ताव भेजा रहा है। परवीन नदी को पांच-पांच मीटर दोनों तरफ से खोद कर चौड़ा करने व गांवों की सुरक्षा के लिए वायरक्रेट लगाने की योजना है। इसके अलावा 21 नालों का भी निर्माण कराया जाएगा।
संजय राज, ईई, सिंचाई खंड सितारगंज