रुद्रपुर। एनएच-74 मुआवजा घोटाले सहित तमाम घपलों में सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग के बाद जिला प्रशासन संजीदा हो गया है। प्रशासन कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम को दुरुस्त कराने के साथ ही सभी तहसीलों में लंबे समय से धूल फांक रही फाइलों को मंगवा रहा है।
यह वे दस्तावेज हैं, जिन्हें कायदे से रिकॉर्ड रूम में होना चाहिए थे, लेकिन जिला बनने के बाद से ही कई फाइलें तहसीलों में बेतरतीब ढंग से रखी हुई हैं। अभी तक 30 हजार फाइलें तहसीलों से आ चुकी हैं, जबकि कलक्ट्रेट में ही एक लाख 30 हजार फाइलें छांटी जा चुकी है। इसके अलावा करीब 12 क्विंटल दस्तावेज नष्ट किए गए हैं।
अक्तूबर 1995 में ऊधमसिंह नगर को नैनीताल से अलग कर जिला बनाया गया था, लेकिन अफसरों की अनदेखी की वजह से जो दस्तावेज कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम में रखने चाहिए थे, वे तहसीलों में अस्त व्यस्त ढंग से पड़े रहे। चकबंदी कार्यालयों से भी रिकॉर्ड रूम को दस्तावेज नहीं भेजे गए। लापरवाही की हद रही कि कई दस्तावेज तो तहसीलों के कर्मचारियों के घरों में रखे रहे।
इसी का नतीजा रहा कि इन दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों ने एनएच-74 जैसे 300 करोड़ रुपयों के घोटाले को अंजाम दिया। इसके अलावा जमीनों के कई बड़े घपलों के अलावा चकबंदी कार्यालयों में दस्तावेजों की मदद से घपलों को अंजाम दिया गया। इन दस्तावेजों का दुरुपयोग न हो इसलिए प्रशासन रिकॉर्ड रूम को व्यवस्थित करने के साथ ही तहसीलों से दस्तावेजों को मंगा रहा है।
रिकॉर्ड रूम में फाइलों को रखने के लिए रैक तैयार की गई हैं और जूनियर रिकॉर्ड कीपर के लिए अलग कक्ष बनाने के साथ ही विकास प्राधिकरण के लिए रिकार्ड रूम बनाया गया है।
कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम को व्यवस्थित कर रैक और कमरे बढ़ाए गए हैं। विभिन्न तहसीलों से 30 हजार फाइलें मंगवाई गई हैं। यह फाइलेेें जिला बनने के बाद से ही रिकॉर्ड रूम में भेजने की बजाय तहसीलों में रखी थीं। कलक्ट्रेट में एक लाख 30 हजार फाइलों की छंटाई की गई है और 12 क्विंटल फाइल नष्ट की गई हैं।
जगदीश कांडपाल, एडीएम नजूल।
फोटो 26आरडीपी 01पी: रुद्रपुर के कलक्ट्रेट में फाइलों की छंटाई करते होमगार्ड।