राज्य सभा में पारित जुवेनाइल विधेयक में जघन्य अपराध करने वाले 16 से 18 की उम्र वाले किशोरों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने की व्यवस्था की गई है। किशोर गुनहगारों से वयस्क अपराधी की तरह बर्ताव किया जाएगा। रुद्रपुर राजकीय संप्रेक्षण गृह में मौजूद 23 में से 13 ऐसे किशोर हैं, जो जघन्य अपराधों के आरोपी हैं। इसके अलावा बाकी पर चोरी, लड़की भगाने और जानलेवा हमले का आरोप है।
रुद्रपुर में संप्रेक्षण गृह वर्ष 2005 में खोला गया था। यहां अपराधों में लिप्त नाबालिगों को रखा जाता है। नाबालिगों को यहीं से सुनवाई के लिए कोर्ट में भेजा जाता है। जिन नाबालिगों को सजा सुनाई जाती है, उसे पूरा करने के बाद ही वे रिहा होते हैं। वर्तमान में यहां 23 किशोर हैं। जिनमें चोरी के आरोप में पकड़े गए 7 आरोपी शामिल हैं। सबसे पुराना आरोपी 17 वर्षीय काशीपुर का है, जो चोरी के मामले में पकड़ जाने के बाद से अप्रैल से यहां हैै। जून से नवंबर तक आए 9 आरोपी ऐसे हैं, जिनके खिलाफ पॉस्को अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हैं। इनमें 4 आरोपियों की उम्र 16 और 5 की उम्र 17 साल है। तीन महीने से हत्या करने के 4 आरोपी रह रहे हैं। अगस्त में हत्या के प्रयास का एक आरोपी है। इसके अलावा लड़की भगाने और सहयोग करने के आरोप में दो किशोर भी संप्रेक्षण गृह में हैं। सहायक अधीक्षक शंकर लाल कहते हैं कि एक आरोपी को छोड़कर बाकी आरोपी छठे महीने से यहां हैं।