सिटी के ध्यानार्थ
फसक और संवाद के बहाने पहाड़ी बोली को बढ़ावा देने की पहल
हल्द्वानी निवासी शेखर जोशी के पहाड़ी वीडियो हो रहे लोकप्रिय
स्क्रिप्ट, शूट और अभिनय का खुद ही संभालते हैं जिम्मा
चंदन बंगारी
रुद्रपुर। पहाड़ी बोली और आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले गुम हो चुके शब्दों को पलायन कर मैदानों में आ बसे लोगों तक पहुंचाने के लिए कलाकार शेखर जोशी अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। वे पहाड़ की जिंदगी, भ्रष्टाचार और छुट्टी पर घर आने वाले फौजियों से शराब की आस, मोबाइल के बढ़ते लगाव से रिश्ते में आने वाली दूरियों सहित विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पहाड़ी भाषा में वीडियो तैयार कर यू ट्यूब पर अपलोड कर रहे हैं। उनके वीडियो यू ट्यूब और सोशल मीडिया में वायरल होने के साथ ही लोगों द्वारा पसंद किए जा रहे हैं।
दरअसल पहाड़ से बेहतर शिक्षा, नौकरी और स्वास्थ्य को लेकर हो रहा पलायन बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। पहाड़ों से पलायन कर महानगरों और विदेशों में बसे लोगों और खासकर युवा पीढ़ी को पहाड़ी बोलचाल से रूबरू कराने के लिए कुसुमखेड़ा हल्द्वानी निवासी एवं निजी कंपनी में अकाउंटेंट शेखर जोशी प्रयोग कर रहे हैं। वे मोबाइल के सेल्फी मोड पर स्वयं पहाड़ी भाषा में वीडियो तैयार कर रहे हैं। उनके वीडियो में पलायन का दर्द, बुजुर्गों का अकेलापन आदि मुद्दे शामिल रहते हैं। अधिकांश चार से छह मिनट के वीडियो पहाड़ के लोगों में बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं। अभी तक का चर्चित वीडियो तीन बुड़-तुमर ख्वौर में मैदान में आकर बसे तीन बुजुर्गों की पहाड़ी में बातचीत बेहद मनोरंजक ढंग से पेश की गई है। केवल घर के चौकीदार की भूमिका में रह गए तीनों बुजुर्ग में से एक तो समय को ही कोसता रहते हैं। यू ट्यूब पर तीन बुड़-तुमर ख्वौर को 2300 और फौजी भाई वीडियो को अब तक 3100 लोग देख चुके हैं। इसके अलावा फेसबुक और व्हाट्सएप पर भी उनके बनाए वीडियो वायरल हो रहे हैं।
ये वीडियो किए गए हैं पसंद
- बाबू की वेदना, दमची, हल्द्वाणि में चोर, कचकच, फौजी भाई और ग्राम प्रधान, तीन बुड़, ईजा बाबू और पनु दूधवाला, चेली ब्या की बात, मासाप और नामकरणौं न्यूत।
इनसेट
‘राखी दिन बैणि बिना जीवन उदास छू’
रुद्रपुर। पत्नी के साथ ही बहनों से प्रेम को लेकर रविवार को ही शेखर ने नया वीडियो बनाया है। राखी पर केंद्रित वीडियो में किरदार कहता है कि ‘पुर साल सैणि बिना और राखी दिन बैणि बिना जीवन उदास छ।’ शेखर का कहना है कि वह सामाजिक पहलुओं पर केंद्रित वीडियो बनाते रहेंगे। उनके वीडियो में कलाकारों के नाम लोकप्रिय करेक्टर बिशन, गोपूका, पिरमू का और भूरी काकी हैं।
कोट
पहाड़ की बोली को मनोरंजन के माध्यम से बढ़ावा देने के लिए फरवरी से वीडियो बनाने शुरू किए थे। वीडियो को पहाड़ों, देश के तमाम हिस्सों के अलावा विदेशों में बसे पहाड़ के लोगों का भी रिस्पांस मिला है। पलायन का दर्द हर किसी के जेहन में है। मेरा मकसद अपनी बोली, भाषा को बढ़ावा देने के साथ ही कोई न कोई संदेश देना भी है। अब तक 23 वीडियो बना चुका हूं। लोगों का निरंतर मिलता प्यार उत्साहवर्धन करता है।
- शेखर जोशी, पहाड़ी वीडियो बनाने वाले कलाकार।
फोटो 19आरडीपी 01पी: शेखर जोशी।