रुद्रपुर। स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत करीब 182 कर्मियों को पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के कारण आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। लगातार ड्यूटी करने के बावजूद भुगतान न होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं लेकिन वेतन अटकने से परिवार चलाना चुनौती बन गया है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, घर का किराया, बिजली-पानी के बिल और बैंक की ईएमआई जैसी जिम्मेदारियों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। कई कर्मियों ने बताया कि समय पर सैलरी न मिलने के कारण उन्हें उधार लेकर घर खर्च चलाना पड़ रहा है, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।
कर्मियों का यह भी कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की तरह काम करते हैं ओपीडी व्यवस्था, रिकॉर्ड संधारण, लैब सहयोग और अन्य जरूरी कार्यों में उनकी भूमिका अहम है। इसके बावजूद समय पर वेतन न मिलना उनके मनोबल को प्रभावित कर रहा है। कर्मचारियों ने लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान कराने की मांग उठाई है, ताकि आर्थिक और पारिवारिक दबाव से राहत मिल सके। स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों की यह स्थिति विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारियों की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।
आउटसोर्स कर्मियों के वेतन भुगतान का मामला संज्ञान में है। संबंधित एजेंसी से समन्वय कर शीघ्र भुगतान कराने की प्रक्रिया कराई जा रही है, ताकि कर्मचारियों को परेशानी न हो। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ