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गन्ना मूल्य निर्धारण में नहीं बनी एक राय

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काशीपुर। सरकार ने गन्ना मूल्य निर्धारण के सुझाव देने के लिए किसानों, चीनी मिल प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों की एक बैठक बृहस्पतिवार को बुलाई गई, लेकिन इसमें आमराय नहीं बन पाई। किसानों ने गन्ना मूल्य पिछले साल से 20 रुपये अधिक देने की मांग की। वैज्ञानिकों ने 394 रुपये और चीनी मिलों ने 225 रुपये रखने का सुझाव दिया।
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बृहस्पतिवार को गन्ना सचिव डी सैंथिल पांडियन की अध्यक्षता में बैठक हुई। चीनी मिल नादेही के प्रबंधक आरके सेठ ने 225, डोईवाला के प्रबंधक मनमोहन सिंह रावत ने 255, प्राइवेट चीनी मिल उत्तम के प्रबंधक एलएम लांबा ने गन्ना का मूल्य 285 तक प्रति क्विंटल रखने का सुझाव दिया। निजी मिल के प्रंबधकों ने कहा कि वह 285 से अधिक मूल्य देने में असमर्थ हैं। किसानों ने कहा कि गन्ना उत्पादन लागत के अनुसार 400 रुपये पर खरीदा जाए। अगर इतना मूल्य नहीं दे सकती है तो पिछले साल के मूल्य से 20 रुपये प्रति क्विंटल अधिक रखा जाए। पिछले साल गन्ना मूल्य 317 और 307 था।

गन्ना अनुसंधान केंद्र काशीपुर के वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार और डॉ. सिद्धार्थ कश्यप ने कहा कि गन्ना उत्पादन में दवाइयों, खाद, बीज, मजदूरी बढ़ने से लागत मूल्य बढ़ गया है। इसलिए गन्ना के मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल रखा जाए। बैठक में गन्ना आयुक्त डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डीसीओ ऊधमसिंह नगर धर्मवीर सिंह, डीसीओ हरिद्वार आशीष नेगी, डीसीओ देहरादून हरिमोहन आदि थे।
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