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बिन चालक कैसे हो ‘खुशियों की सवारी’

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काशीपुर। सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं एक के बाद एक दम तोड़ रही है। जीवीके कंपनी ने सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को लाने के लिए 108 एंबुलेेंस अनुबंधित सरकारी अस्पताल में भेजी थी, जिसकी आए दिन किसी न किसी कारण मरम्मत करनी पड़ती है।
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साथ ही डिलीवरी के बाद जच्चा बच्चा को अस्पताल से घर छोड़ने के लिए करीब छह महीने पूर्व एलडी भट्ट अस्पताल में खुशियों की सवारी को भेजा गया था। पांच महीने से रोज करीब आठ जच्चा-बच्चा को घर छोड़ा है लेकिन किसी बात को लेकर एक महीने पूर्व खुशियों की सवारी का चालक नौकरी छोड़कर जा चुका है।

तब से खुशियों की सवारी अस्पताल में खड़ी धूल फांक रही है। इससे लोगों को असुविधा हो रही है। जीवीके कंपनी के स्टेट हेड मनीष टिंकू ने कहा कि खुशियों की सवारी में चालक नहीं होने की जानकारी नहीं है।
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शीघ्र ही चालक की व्यवस्था की जाएगी।
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