अमर उजाला फॉलोअप
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जगबुढ़ा नदी में रिवर ट्रेनिंग का टेंडर निरस्त
- डीएम ने डीएफओ के पत्र के आधार पर निरस्त किया टेंडर, पत्थर पिचिंग से हुए सुराखों को भरेगा सिंचाई विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
खटीमा।
जगबुढ़ा नदी में रिवर ट्रेनिंग नाम पर अवैध खनन का मामला सामने आने के बाद राजस्व और वन विभाग में चल रही खींचतान के बीच डीएम ने टेंडर को निरस्त कर दिया है। डीएम ने इसकी सूचना संबंधित विभागों के साथ ही टेंडर लेने वाली महिला को भी दे दी है। सिंचाई विभाग पत्थर पिचिंग में बने सुराखों को भरने का काम करेगा।
जगबुढ़ा नदी में रिवर ट्रेनिंग के लिए डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने खेलड़िया निवासी ममता बोरा के नाम पर टेंडर किया था। टेंडर होने के बार खनन ठेकेदार ने जगबुढ़ा नदी में खनन शुरू कर दिया था। खनन क्षेत्र के वन आरक्षित में आने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने अचानक शुक्रवार शाम जगबुढ़ा नदी में खनन रुकवा दिया था। इससे राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ ही वन विभाग में भी हड़कंप मच गया था। डीएफओ नितीश मणि त्रिपाठी ने डीएम को पत्र लिखकर जगबुढ़ा नदी को आरक्षित वन क्षेत्र में बताया। डीएफओ के पत्र के आधार पर डीएम ने रिवर ट्रेनिंग करा टेंडर खनन का टेंडर निरस्त कर दिया है। अब रिवर ट्रेनिंग का कार्य नहीं किया जाएगा। सिंचाई विभाग पत्थर पिचिंग में हुए सुराखों को बालू से भरने का काम करेगा। फिलहाल
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