काशीपुर। स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयास के बाद भी कुष्ठ रोग पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। आसपास के क्षेत्रों में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में 11 रोगियों को दवा खिलाई जा रही है। राष्ट्रीय अभियान के तहत विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क उपचार उपलब्ध है। एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय की ओर से क्षेत्र में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सुपरवाइजर पीसी सनवाल ने बताया कि वर्ष 2019 में यहां तीन रोगी पंजीकृत थे। वर्तमान में 11 मरीज दवा खा रहे हैं। अप्रैल से जून तक पांच नए मरीज पाए गए हैं।
अस्पताल से दवा देकर इलाज शुरू कर दिया है। वर्तमान में 11 कुष्ठ रोगी दवा खा रहे हैं। करीब एक साल तक दवा खानी होती है। इस रोग को नियंत्रित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय मल्टी-ड्रग थेरेपी एमडीटी) का उपयोग करना, जो एक एंटीबायोटिक दवाओं का संयोजन है। साथ ही रोग का जल्दी पता लगाकर उपचार शुरू करना भी बहुत महत्वपूर्ण है ताकि विकलांगता को रोका जा सके।
कुष्ठ रोग के लक्षण:
- त्वचा के धब्बे अक्सर उभरे हुए किनारों के साथ, जो उनके आस-पास के क्षेत्रों से अलग होते हैं। वे फीके, पीले, लाल, मोटे, कठोर, सूजे हुए या सुन्न हो सकते हैं।
- लाल या बैंगनी रंग की गांठें
-पैरों के तलवे पर दर्द रहित अल्सर या घाव
-बढ़ी हुई नसें
-कमजोरी
-भौंहों या पलकों का झड़ना
-दृष्टि हानि या अन्य नेत्र संबंधी समस्याएं
-कुष्ठ रोग धीरे-धीरे विकसित होता है। इसके संपर्क में आने के बाद लक्षण विकसित होने में कई साल, कभी-कभी दशक भी लग जाते हैं।
कारण:
-माइकोबैक्टीरियम लेप्री बैक्टीरिया कुष्ठ रोग का कारण बनता है। विशेषज्ञ पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं कि यह बीमारी कैसे फैलती है, लेकिन उनका मानना है कि यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा में मौजूद बूंदों के जरिए फैलता है।
क्या कुष्ठ रोग संक्रामक है?
हां कुष्ठ रोग संक्रामक है (एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है) लेकिन इसे पाना आसान नहीं है। कुष्ठ रोग होने के लिए किसी व्यक्ति के साथ लंबे समय तक निकट संपर्क में रहना पड़ता है। अधिकांश लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली इससे लड़ती है।
कोट:
कुष्ठ रोग पर नियंत्रण पाने के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम चल रहा है। क्षेत्र में ऐसे रोगियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए जाएंगे।
- डॉ. राजीव कुमार गांधी, सीएमएस, काशीपुर