...तो डिप्टी और असिस्टेंट कमिश्नर के तीन पदों पर ही होंगे तबादले
रिक्त पदों को प्रसुप्तावस्था में डाला, अन्य पदों से ग्रुपिंग की गई
रुद्रपुर। राज्य कर विभाग में सुगम दुर्गम केे अजब निर्धारण के बाद तबादलों को लेकर भी मैदान में जमे अफसरों को राहत देने की कवायद की गई है। विभाग की वेबसाइट पर डिप्टी कमिश्नर के एक पद और असिस्टेंट कमिश्नर के दो पदों को ही विज्ञापित किया गया है। लिहाजा इन तीन पदों पर ही ट्रांसफर हो सकेंगे।
अफसरों की कमी का हवाला देते हुए डिप्टी कमिश्नर के 15 और असिस्टेंट कमिश्नर के 19 पदों को प्रसुप्तावस्था में डालकर इनकी अन्य पदों से ग्रुपिंग की गई है। ऐसी स्थिति में दो पदों पर लंबे अरसे से मैदान में जमे अफसर तबादले के रडार पर आने से बच जाएंगे। विभाग में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब इतनी संख्या में पदों को विज्ञापित किए बिना प्रसुप्तावस्था में डालकर ग्रुपिंग की गई है।
राज्य कर विभाग में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार जिलों में डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर की कुर्सियों पर काफी अरसे से अफसर जमे हुए हैं। तबादला अधिनियम के तहत दुर्गम में नौकरी करने वालों को सुगम में सेवाएं देने का मौका मिले, ऐसी व्यवस्था है। लेकिन, राज्य कर विभाग में तबादलों की जद में मैदान में जमे अफसरों की कुर्सियां हिलने वाली नहीं हैं।
विभाग ने डिप्टी कमिश्नर के 15 और असिस्टेंट कमिश्नर के 19 रिक्त पदों को विज्ञापित करने के बजाय उन्हें प्रसुप्तावस्था में डालकर उनकी ग्रुपिंग अन्य पदों से कर दी है। विभागीय वेबसाइट में डिप्टी कमिश्नर का ऋषिकेश और असिस्टेंट कमिश्नर के विकासनगर और रामनगर को विज्ञापित किया गया है।
राज्य कर अधिकारी के करीब 42, ज्वाइंट कमिश्नर के छह और नियंत्रक सचल दल के 19 पदों को प्रसुप्तावस्था में रखा गया है। ऐसे में जब दुर्गम के पदों को विज्ञापित ही नहीं किया जाएगा तो सुगम में जमे अफसरों का तबादला कैसे हो सकेगा। कुल मिलाकर अफसरों की कुर्सी न हिले, इसको लेकर पूरे इंतजाम तबादला नीति में किए गए हैं।
संभाग से बाहर भी हुई ग्रुपिंग
रुद्रपुर। राज्य कर विभाग में प्रसुप्तावस्था में डाले गए पदों की ग्रुपिंग भी अजब ढंग से की गई है। अमूमन एक ही संभाग में पदों की ग्रुपिंग की जाती है। लेकिन, डिप्टी कमिश्नर पिथौरागढ़ के पद की ग्रुपिंग सितारगंज के साथ की गई है। वहीं डिप्टी कमिश्नर रुद्रपुर की ग्रुपिंग अल्मोड़ा के साथ हुई है। ऐसे में इन पर सवाल उठने लाजमी हैं।
विभाग में अफसरों के रिक्त पद होने की वजह से उन पदों की अन्य पदों के साथ ग्रुपिंग की गई है, ताकि कामकाज सुचारु ढंग से चल सके। सुगम-दुर्गम का निर्धारण सही है। जो अधिकारी तीन साल से अधिक समय से दुर्गम में हैं वे सुगम और जो चार साल से सुगम में हैं वे दुर्गम में जाएंगे। - सौजन्या, आयुक्त, राज्यकर विभाग।