उत्तराखंड में एक जनवरी से गुटखा समेत तंबाकू युक्त अन्य खाद्य पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए न सिर्फ छापेमारी करने की तैयारी है, बल्कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर अधिकतम दो लाख रुपये तक का जुर्माना भी किया जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने 15 अक्तूबर को गुटखा पर प्रतिबंध लगाने के लिए जीओ जारी किया था। लेकिन देर शाम तक सरकार ने इस फैसले को खारिज कर दिया। 17 अक्तूबर को कैबिनेट ने गुटखा व्यापारियों को स्टॉक क्लेयरेंस के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया और एक जनवरी 2013 से गुटखा समेत तंबाकू युक्त अन्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पास कर दिया था।
अधिकतम दो लाख रुपये तक जुर्माना
एक जनवरी से प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए शासन ने खाद्य सुरक्षा विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं। थोक विक्रेताओं पर नजर रखने के साथ दबिश के आदेश भी दिए गए हैं। पकड़े जाने पर व्यापारियों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में केस दर्ज होगा। संयुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त पीयूष सिंह ने बताया खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने रिपोर्ट दी है कि गुटखा के व्यापारियों ने स्टाक समाप्त कर दिया है। डीओ और एफएसओ को निर्देश जारी किया गया है कि एक जनवरी से बिक्री के संदिग्ध ठिकानों पर दबिश देकर सामग्री जब्त करें। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर अधिकतम दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
कैसे होगी कार्रवाई?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत खाद्य सुरक्षा संवर्ग के ढांचे का पुनर्गठन कर दिया गया है। लेकिन संवर्ग में अभी तक मात्र 35 फीसदी ही नियमित स्टाफ हैं। कैबिनेट ने संवर्ग में 96 पद नियमित व 43 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाने का प्राविधान किया है। मौजूदा समय में 33 नियमित एफएसओ हैं।