चार माह में आसमान से बारिश नहीं होने से भागीरथी व भिलंगना नदी के बहाव में कमी आई है। दोनों नदियों से केवल 40 क्यूमेक्स पानी ही आ रहा है, जिसका असर टिहरी बांध की झील के जलस्तर से लेकर विद्युत उत्पादन पर भी पड़ने लगा है।
झील का जलस्तर आरएल 824 से घटकर आरएल 813.35 मीटर पहुंच गया है, जबकि उत्पादन भी सात मिलियन यूनिट ही हो रहा है। जल्द बारिश न हुई तो विद्युत उत्पादन और कम होने के साथ ही मैदान क्षेत्रों में सिंचाई एवं पीने के पानी का संकट गहरा सकता है।
सितंबर माह से आधा दिसंबर गुजरने के बाद भी बारिश नहीं हुई है। बारिश न होने से फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन इसका खासा असर टिहरी बांध पर पड़ सकता है। बारिश न होने के चलते भागीरथी नदी से 29 और भिलंगना से 11 क्यूमेक्स पानी ही आ रहा है। जिसके चलते बांध की झील का का जलस्तर लगातार घटने लगा है।
जलस्तर आरएल 813.35 मीटर पहुंच गया है, जबकि झील से 164 क्यूमेक्स पानी ही बांध से नदी के ओर छोड़ा जा रहा है। बांध की चारों टरबाइनों से 7 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है। 20 सितंबर तक भागीरथी नदी से 577, भिलंगना से 342 क्यूमेक्स पानी आ रहा था।
झील से 370-80 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा था। विद्युत उत्पादन भी 11-12 मिलियन यूनिट हो रहा था। हालांकि टीएचडीसी प्रबंधन जलस्तर घटने का असर विद्युत उत्पादन पर न पड़ने की बात कर रहे हैं। जल्द बारिश नहीं हुई, तो जलस्तर और घट सकता है। जिससे विद्युत उत्पादन में कमी के साथ ही उत्तराखंड के मैदानी जिलों समेत दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश में सिंचाई, पेयजल और विद्युत किल्लत बढ़ सकती है।
बारिश न होने से भागीरथी एवं भिलंगना नदी से पानी जरूरत कम आ रहा है, लेकिन इस मौसम में हमेशा ही स्थिति रहती है। लेकिन इसका असर विद्युत उत्पादन पर नहीं पड़ा है।
-एचएल आरोड़ा, अधिशासी निदेशक टीएचडीसी ऋषिकेश।