भिलंगना ब्लॉक के सीमांत गंगी गांव में बेशकीमती हरे पेड़ काटने के तीन आरोपियों ने मंगलवार को वन विभाग की जांच टीम के सामने सरेंडर कर लिया। बुधवार सुबह आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने तीनों को 14-14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। डीएफओ ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
लॉकडाउन के दौरान गंगी गांव के ताल नामे तोक में करीब आठ सौ हरे पेड़ काटे गए थे। 26 जून को मामले का खुलासा होने पर वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जहां विभाग ने बड़ी संख्या में हरे पेड़ काटे जाने की पुष्टी की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम मंगेश घिल्डियाल ने 30 जून को एसडीएम संदीप तिवारी की अध्यक्षता में वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित करते हुए स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। मौके पर पहुंची टीम ने क्षेत्र में कॉबिंग करने के बाद ताल नामे तोक में सिविल सोयम की भूमि पर 745 पेड़ और आरक्षित वन भूमि पर 65 हरे पेड़ काटने की रिपोर्ट डीएम और डीएफओ डा. कोको रोसे को सौंपी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि ताल नामे तोक में बांज, बुरांश, भमोरा और प्रतिबंधित प्रजाति थुनेर के पेड़ काटकर वहां अवैध रूप से चार-पांच छानियां भी निर्माणाधीन हैं। रिपोर्ट के आधार पर डीएफओ आरोपियों की धरपकड़ के लिए जांच टीम को मौके पर भेजा।
घटना के 20 दिन बाद गंगी के तीन लोगों ने जांच टीम के सामने पेड़ काटने का जुर्म कबूल करते हुए सरेंडर कर दिया है। डीएफओ डा. कोको रोसे ने बताया कि पेड़ काटने के आरोपी गंगी गांव निवासी शूरवीर, मगन सिंह, अषाढ़ सिंह ने मंगलवार को जांच टीम के सामने सरेंडर किया। आरोपियों को बुधवार को सिविल जज संदीप कुमार की अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने तीनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।