बालगंगा महाविद्यालय का राजकीयकरण अधर में लटक गया है जिसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। महाविद्यालय में कक्ष-कक्षों, प्रयोगशाला और शौचालय का अभाव बना हुआ है। बालगंगा महाविद्यालय के राजकीयकरण करने की मुख्यमंत्री की घोषणा हवा-हवाई साबित हुई।
1991 में क्षेत्र के लोगों ने स्वयं के संसाधनों से सेंदुल में एक निजी भवन पर बालगंगा महाविद्यालय की स्थापना की थी। छात्र संख्या बढ़ने पर ग्रामीणों ने महाविद्यालय निर्माण के लिए बालगंगा शिक्षा प्रसार समिति को 50 नाली भूमि दान दी। समिति ने 2001 में सेंदुल महाविद्यालय का भवन निर्माण कराया। 2 फरवरी 2009 में तत्कालीन सीएम भुवन चंद्र खंडूड़ी और 9 दिसंबर 2018 को तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बालगंगा महाविद्यालय को अनुदान देने की घोषणा की थी।
2015-16 में स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय भी शुरू हो गया। वर्तमान में बीए में 10 और बीएससी में पांच विषय संचालित हो रहे हैं। 2022-23 में छात्र संख्या बढ़कर 639 तक पहुंच चुकी है लेकिन सबसे बड़ी समस्या कक्ष-कक्षों की बनी हुई है। प्रयोगशाला और शौचालय की भी महाविद्यालय में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है। सिर्फ दो शौचालय बने हैं। पुराना भवन जर्जर स्थिति में है। प्राचार्य डाॅ. बीसी उनियाल ने बताया महाविद्यालय में एक भवन निर्माणाधीन है। सत्र में नया भवन बनकर तैयार हो जाएगा।
महाविद्यालय का नया भवन बन रहा है। कक्षा-कक्षों का अभाव जल्द दूर हो जाएगा। गत वर्ष दो शौचालय बनाए गए है। शासन स्तर पर राजकीयकरण की प्रक्रिया गतिमान है।
-शक्ति लाल शाह, विधायक घनसाली