41वें कुंजापुरी महोत्सव मेला 2016 की पहली शाम लोक भाषा संस्कृति के नाम रही। साहित्यकारों और लोक कलाकारों ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। शनिवार रात कुंजापुरी महोत्सव में पहली बार लोक भाषा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कवयित्री नीता कुकरेती ने जय महादेव जगत का स्वामी रचना से सम्मेलन की शुरुआत की। मदन मोहन डुकलाण ने जख देवतों का ठौ छन भैजी रचना के जरिए लोक जीवन को बयां किया। राकेश मोहन ध्यानी ने लागी त्वै अपड़ी लगौंलू ऐ बि जा.. प्रस्तुत की। गणेश खुगशाल गणी ने सूबेदार बौड़ा रचना प्रस्तुत कर लोगों की तालियां बटोरीं।
देवेंद्र उनियाल ने ढूंगू कविता के माध्यम से कागजी विकास की स्थिति बयां की। इस अवसर पर रचनाकार धनेश कोठारी, नरेंद्र रयाल, सत्येंद्र चौहान आदि ने कविताएं प्रस्तुत की। उधर, गौरांगना सांस्कृतिक कला समिति की ओर से लोकगीत-नृत्य प्रस्तुतियां दी गई।
संस्था की संरक्षक डा. माधुरी बड़थ्वाल और अध्यक्ष नीता कुकरेती की अगुवाई में महिला कलाकारों ने मांगल गीत, हे दीदी हे भुली हे ब्वारी आदि लोकगीतों के साथ नृत्य प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष दुर्गा राणा, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राणा, जयपाल नेगी, राजेंद्र गुसाईं, महेश गुसाईं आदि मौजूद थे।