हरिद्वार महाकुंभ में स्नान के लिए पर्याप्त पानी छोड़ने के लिए टीएचडीसी ने तैयारी कर ली है। टीएचडीसी अप्रैल में होने वाले शाही स्नानों के दिन 300 क्यूमेक्स पानी छोड़ेगी। टीएचडीसी वर्तमान में 140 क्यूमेक्स पानी छोड़ रही है, लेकिन शाही पर्वों पर होने वाले स्नान के लिए दोगुना पानी झील से छोड़ा जाएगा।
टीएचडीसी इंडिया हरिद्वार में विभिन्न पर्वों पर होने वाले स्नानों के लिए पानी छोड़ता है, लेकिन इस बार हो रहे महाकुंभ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान के लिए दोगुना पानी छोड़ेगा। हरिद्वार महाकुंभ की आधिकारिक शुरुआत मकर संक्रांति 14 जनवरी से हो चुकी है। 11 मार्च को शिवरात्रि पर पहला शाही स्नान हो चुका है। बावजूद 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या, 14 अप्रैल को बैसाखी, 27 अप्रैल को बैसाख पूर्णिमा पर आखिरी शाही स्नान की तिथियां निर्धारित हैं। ऐसे में लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के स्नान के लिए टीएचडीसी टिहरी बांध से इन पर्वों पर 300 क्यूमेक्स पानी छोड़ेगी।
पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार बर्फबारी और बारिश कम हुई है। ऐसे में झील का जलस्तर कम रहना स्वाभाविक है, जिसको देखते हुए टीएचडीसी भी झील में पानी की पर्याप्त मात्रा में रख रहा है। वर्तमान में झील से 140 क्यूमेक्स पानी छोड़ रहा है, जबकि पिछले वर्ष इन दिनों करीब 200 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा था। झील का जलस्तर आरएल 757.47 मीटर है। झील का न्यूनतम जलस्तर 740 मीटर रहना जरूरी है। टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक वीके बडोनी का कहना है कि विद्युत उत्पादन के साथ जन भावना और श्रद्धालुओं की आस्था को सर्वोपरी रखते हुए हरिद्वार महाकुंभ के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा। बांध से इन दिनों सात मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है।