संवाद न्यूज एजेंसी
नई टिहरी। टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक एलपी जोशी ने पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि टिहरी बांध सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत है। कहा कि मिट्टी और पत्थरों से बनाए गए बांध की 8 रिएक्टर भूकंप तक सहने की क्षमता है। जबकि बांध से 13 हजार क्यूमेक्स पानी की निकासी आसानी से हो सकती है। यहां से वर्तमान में प्रत्येक दिन 24 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है।
बृहस्पतिवार को भागीरथीपुरम में पत्रकार वार्ता करते हुए टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक एलपी जोशी ने सोशल मीडिया में टिहरी बांध की सुरक्षा को चल रही खबरों को भ्रामक बताया। कहा कि टिहरी बांध का निर्माण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तकनीक और सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया गया है। कहा कि बांध के डिजाइन को एचपीआई माक्सो और आईआईटी रुड़की के तकनीकी विशेषज्ञों से लेकर प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो.जय कृष्णन का तकनीकी परीक्षण करवाया गया था। बताया कि टिहरी बांध की सुरक्षा के लिए 350 से अधिक आधुनिक तकनीकी के उपकरण लगाए गए हैं। जबकि बांध की सुरक्षा को लेकर भी देश-विदेश के कई वैज्ञानिकों ने शोध भी किया है।
टिहरी बांध से 13 हजार क्यूमेक्स पानी आसानी से छोड़ सकते हैं। बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में बांध से 7500 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया था। बताया कि टिहरी बांध में कई बार आपदा के दौरान पानी रोककर मैदानी क्षेत्रों को बाढ़ से भी बचाया गया है। जलस्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव के लिए आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक करने के लिए साइरन से लेकर प्रचार वाहनों से सूचना दी जाती है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार झील में ज्यादा पानी आ रहा है। वर्तमान में जलस्तर आरएल 810 मीटर पहुंच गया है। जबकि बांध की चारों टरबाइन से 24 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है। इस मौके पर टीएचडीसी के अपर महाप्रबंधक डाॅ एएन त्रिपाठी, प्रबंधक मनवीर सिंह नेगी, दीपक उनियाल, आरडी ममगाईं आदि मौजूद थे।