टिहरी बांध डूब क्षेत्र के गरीब प्रभावितों को अभी तक पुनर्वास महकमा उनके भूमि-भवनों का मुआवजा नहीं दे पाया है। ऐसे में गरीब पृष्ठभूमि के लोगों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। थौलधार ब्लाक के सरोट गांव निवासी कुंदन लाल पुत्र चिंद्रिया लाल ने बताया कि उनका पैतृक मकान टिहरी झील की 835 मीटर की परिधि में आता है, लेकिन झील भरने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। लकवाग्रस्त कुंदन लाल ने बताया कि उनके पास बीमारी के इलाज के भी पैसे नहीं हैं।
सरोट गांव के पूर्व प्रधान शूरवीर सिंह राणा, फतेह सिंह कैंतुरा ने पुनर्वास महकमे से पीड़ित व्यक्ति को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। छाम गांव निवासी प्यारी देवी व दिलमा देवी पुत्री ग्वाणू की भी यही व्यथा है। उन्हें पुनर्वास विभाग की ओर से अभी तक पैतृक घर का मुआवजा नहीं दिया गया है, जबकि छाम गांव के अन्य प्रभावितों को मुआवजा मिल गया है।
उनका परिवार पिछले 10 साल से पुराने प्राइमरी स्कूल के जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं। बिजली-पानी की सुविधा के बिना उन्हें जैसे-तैसे गुजर बसर करना पड़ रहा है। बताया गया कि टीएचडीसी की ओर से 2006-07 में एक रैन बसेरे का निर्माण किया गया था, जो कि 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त हो गया था।
मगर न तो इसकी मरम्मत की गई और न ही उन्हें अभी तक पैतृक मकान का मुआवजा ही दिया गया। पुनर्वास निदेशालय के अधिशासी अभियंता शरद श्रीवास्तव का कहना है कि ये मामले संज्ञान में नहीं हैं। अगर ऐसा है तो इनको दिखवाया जाएगा और प्रभावितों को भूमि का मुआवजा दिया जाएगा।