सरकार भले ही युवाओं को तकनीकी शिक्षा देकर स्वरोजगार देने का डंका पीट रही हो, लेकिन थौलधार ब्लॉक क्षेत्र में सरकार की युवाओं को तकनीकी शिक्षा देने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। क्षेत्र के युवाओं को आईटीआई में प्रवेश लेने के लिए 70 किमी दूर चंबा या फिर नई टिहरी का रुख करना पड़ रहा है। युवाओं को तकनीकी शिक्षा देने के लिए दो करोड़ 30 लाख की लागत से बना आईटीआई भवन भी देखरेख के अभाव में खंडहर होता जा रहा है।
वर्ष 2006 से कंडीसौड़ आईटीआई की स्वीकृति मिली थी। तब से आईटीआई विकास विभाग के एक कमरे में संचालित हो रहा था, जिसमें सिर्फ डाटा इंट्री ऑपरेटर ट्रेड संचालित हो रहा था। लेकिन इस सत्र से उक्त ट्रेड भी बंद हो गया है। प्रवेश लेने के लिए छात्र-छात्राओं को 70 किमी दूर चंबा या नई टिहरी का रुख करना पड़ रहा है। घर से दूर बच्चों को आईटीआई में प्रवेश दिलाने पर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यही नहीं इंटर कॉलेज के समीप 2 करोड़ 70 लाख से आईटीआई के नए भवन और आवासीय परिसर निर्माण की स्वीकृति 2015 में मिली थी। नया भवन बनने पर आईटीआई में इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर, सिलाई, फैशन डिजायनिग और फीडर के नए ट्रेडों का संचालन होना था। दो करोड़ 30 लाख की लागत से भवन निर्माण कार्य गत वर्ष लगभग बनकर तैयार हो गया है, लेकिन देखरेख के अभाव में भवन भी खंडहर होता जा रहा है। आईटीआई में कार्यरत प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को दूसरी जगह अटैच कर दिया गया है। गांव के अतोल सिंह गुसाईं, सुरेंद्र राणा, महावीर सिंह, महेंद्र सिंह, पूर्व बीडीसी सदस्य शैला गुसाईं का कहना यदि आईटीआई बंद करना था तो सरकार ने दो करोड़ की लागत से भवन निर्माण क्यों किया। यदि दोबारा से आईटीआई का संचालन नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे।