संसार के कोने-कोने तक भारतीय संस्कृति का पताका फहराने वाले स्वामी रामतीर्थ महाराज की 148वीं जयंती बृहस्पतिवार से सादगी से दो दिन तक मनाने का निर्णय लिया गया। पहली बार कोटी कालोनी के निकट स्वामी रामतीर्थ की समाधि स्थल पर हवन-पूजन के साथ ही युवाओं के लिए संस्कारों की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी। स्वामी रामतीर्थ को मां गंगा और पुरानी टिहरी से बहुत स्नेह था। इसीलिए उन्होंने गंगा तट पर टिहरी की पम पावन वादियों को साधना के लिए चुना। कठोर तप करने के बाद उन्होंने टिहरी में मानव जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त किया था। स्वामी जी ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में अपना पार्थिव शरीर टिहरी में मां गंगा को समर्पित कर दिया था। काका हरिओम ने बताया कि स्वामी रामतीर्थ के विचारों का प्रचार जरूरी है। स्वामी रामतीर्थ की जयंती की पूर्व संध्या पर 21 अक्तूबर को ऑनलाइन वेदांत सम्मेलन और 22 अक्तूबर को कोटीकालोनी में हवन पूजन किया जाएगा।