भागीरथी और भिलंगना घाटी की बारिश ने टीएचडीसी की मुश्किलें कम कर दी है। बारिश से विद्युत उत्पादन में करीब चार गुना से अधिक वृद्धि हो गई है। वर्तमान मेें बांध की चारों टरबाइनों से 19.5 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है, जबकि झील का जलस्तर आरएल 783.60 मीटर पहुंच गया है। मई-जून में बारिश नहीं होने से झील का जलस्तर निचले स्तर पर आरएल 741 मीटर और उत्पादन तीन मिलियन यूनिट तक पहुंच गया था। ऐसे में टीएचडीसी को आर्थिक नुकसान के साथ ही मैदानी इलाकों में सिंचाईं एवं पेयजल की समस्या भी पैदा हो गई थी।
इस वर्ष बारिश और बर्फ कम होने के कारण झील का जलस्तर आरएल 741 मीटर तक पहुंच गया है। भागीरथी और भिलंगना नदी से केवल 60 से 70 क्यूमेक्स पानी ही आ रहा था। इससे विद्युत उत्पादन निचले स्तर के तीन मिलियन यूनिट पहुंच गया था, लेकिन जून अंतिम सप्ताह से शुरू हुई बारिश से जलस्तर में करीब 42 मीटर की वृद्धि हो चुकी है। वर्तमान में जलस्तर आरएल (रिजर्व वाटर लेबिल) 783.60 मीटर पहुंच गया है, जिससे बांध की चारों टरबाइनें चलने से 19.5 मिलियन यूनिट पहुंच गया है। वर्तमान में पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश से झील में आठ से 12 सौ क्यूमेक्स पानी आ रहा है, लेकिन मैदानी क्षेत्रों को बाढ़ से बचाने के लिए टीएचडीसी द्वारा झील से चार से पांच सौ क्यूमेक्स पानी ही डिस्चार्ज किया जा रहा है। इस माह 15 से 18 जुलाई को हुई बारिश से सर्वाधिक 10 मीटर की जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है।
टीएचडीसी को उम्मीद है कि इस माह के अंत तक और अगस्त में होने वाली बारिश से जलस्तर आरएल 825 तक पहुंच जाएगा, जिससे बांध की अधिकतम क्षमता के अनुरूप 25 से 30 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर सकेगा।
जलस्तर में वृद्धि होने से बांध की चारों टरबाइनों से 19.5 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है। बारिश की और संभावनाओं को देखते हुए धीरे-धीरे झील को भरा जा रहा है। साथ ही मैदानी इलाकों में पेशानियां न हो पानी को डिस्चार्ज करने में इसका भी ध्यान रखा जा रहा है।
-यूके ठाकुर, अपर महाप्रबंधक, टीएचडीसी भागीरथीपुरम।