श्रीनगर में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजि कवि संमेलन में कविता पाठ करते कवि।
- फोटो : Amar Ujala
हिमालय साहित्य एवं कला परिषद की ओर से स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने देश भक्ति से ओत-प्रोत कविताएं सुनाकर लोगों में उत्साह का संचार किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नगर निगम देहरादून के मेयर विनोद चमोली ने किया। भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सचिव ज्ञान सिंह रावत विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष विपिन मैठानी ने की।
गाजियाबाद के कवि अली हसन मरकैंडिया ने ‘मंदिर से मस्जिद से निकलो गिरजे व गुरुद्वारों से, करो देश की आज हिफाजत भीतर के गद्दारों से’ कविता सुनाई देहरादून से आए कवि राकेश चंद्र जुगराण ने ‘जलाकर चंद पुतले हमने समझा मर गया रावण’, कीर्तिनगर के युवा कवि जय कृष्ण पैन्यूली ने ‘उन्हें मिट्टी की खुशबू से जब भी जुखाम होता है, बस यहीं पर देश नाकाम होता हैं’।
नीरज नैथानी ने ‘हां लिखूंगा बेशक बदस्तूर बेहिसाब लिखूंगाट’ कविताएं सुनाई। श्रीनगर के कवि देेवेंद्र उनियाल ने पर्यावरण पर केंद्रित रचना सुनाई। रुड़की के शायर ओम प्रकाश नूर ने ‘जब जबीं का निशान बोलेगा, आप अपना बयान बोलेगा, हाथ तेरे हैं तीर तेरा है कब तू मुंह से कमान बोलेगा’ जैंसे शेर सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।