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Tehri News: मुख्यमंत्री की घोषणा पर भी नहीं मिला मालिकाना हक

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शहर के 11 सौ परिवारों पर लटकी है अतिक्रमण की तलवार
नई टिहरी। टिहरी बांध विस्थापित शहरवासियों को अतिरिक्त स्पेस वाली भूमि का दो-दो मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। पुनर्वास निदेशालय ने सरकार के निर्देश पर अतिक्रमण वाली भूमि, भवनों का सीमांकन कर रिपोर्ट शासन को भेजी थी लेकिन दो साल बाद भी विस्थापितों को अतिरिक्त भूमि का मालिकाना हक नहीं मिल पाया जिसके चलते शहर के करीब 11 सौ परिवारों पर अतिक्रमण की तलवार लटकी है।
पुरानी टिहरी डूबने के बाद बने नई टिहरी, बौराड़ी, मोलधार, ढुंगीधार समेत अन्य स्थानों पर पुनर्वास निदेशालय ने अधिकांश विस्थापितों को अविकसित भूखंड आवंटित किए थे। विस्थापितों ने अविकसित भूखंडों को विकसित कर मकान, दुकान समेत अन्य तरह के निर्माण किए थे लेकिन विकसित के बाद बढ़े भूमि के अतिरिक्त क्षेत्रफल को प्रशासन अतिक्रमण मान रहा है। ऐसे में अतिरिक्त भूमि पर किए गए निर्माण पर अतिक्रमण की तलवार लटकी हुई है।
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2018 में प्रशासन ने करीब 164 स्थानों से अतिक्रमण हटाया था। बांध विस्थापित सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें दूसरे स्थान से शहर में विस्थापित किया गया है। पुनर्वास नीति के अनुसार उन्हें विकसित भूखंड आवंटित कर दिए जाने चाहिए थे। बावजूद उन्हें अविकसित भूखंड दिए गए जिनको उन्होंने अपने संसाधनों से विकसित किया है। ऐसे में उक्त भूमि को अतिक्रमण न मानकर उन्हें न्यूनतम दर पर दी जाए।
फरवरी 2021 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत और सितंबर 2021 में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बांध विस्थापितों को अतिरिक्त स्पेस वाली भूमि का मालिकाना हक देने की घोषणा करते हुए जिला प्रशासन को सर्वे का रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देश पर प्रशासन से सर्वे करवाकर शहर के करीब 11 परिवारों के अतिरिक्त स्पेस वाली भूमि, दुकान और मकान की सूची शासन को भेजी थी। ऐसे में विस्थापितों को उम्मीद है कि यदि सीएम की घोषणा पर उन्हें अतिरिक्त भूमि का मालिकाना हक मिलेगी। लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने पर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

पुरानी टिहरी से मजबूरी में उन्हें यहां विस्थापित किया है। पुनर्वास नीति के तहत विस्थापितों को भूखंड विकसित करके देने थे लेकिन उन्हें अविकसित भूखंड दिए। जिन्हें विस्थापितों ने स्वयं विकसित किया। ऐसे में अतिरिक्त भूमि का मालिकाना हक मिलना चाहिए।
-लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, अध्यक्ष टिहरी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघर्ष समिति।

शहर के बांध विस्थापितों को अतिरिक्त स्पेस वाली भूमि का मालिकाना हक देने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री से इस संबंध में वार्ता भी हुई है। इसमें कुछ कानून पेंच भी है, जिन्हें हल करने का रास्ता निकाला जा रहा है। जल्द इस दिशा में सकारात्मक परिणाम आएंगे।
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-किशोर उपाध्याय, विधायक टिहरी विधानसभा क्षेत्र।

शहर में अतिरिक्त स्पेस वाली भूमि कर सर्वे कराया गया था जिसमें करीब 11 सौ प्रकरण चिह्नित किए गए हैं। शासन से जो निर्देश मिलेेंगे, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
-धीरेंद्र सिंह नेगी, अधिशासी अभियंता, अवस्थापना खंड पुनर्वास।
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