रेडियोलाजिस्ट, सर्जन और बाल रोग विशेषज्ञ की नहीं हो पाए तैनात
नई टिहरी। पीपीपी मोड से हटने के बाद जिला अस्पताल बौराड़ी की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। डॉक्टरों के स्वीकृत 38 पदों के सापेक्ष मात्र 14 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। ब्लड बैंक का भी संचालन नहीं हो पाया है। अल्ट्रासाउंड न होने से सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ रही है।
बीते आठ जून को पीपीपी मोड से जिला अस्पताल का अनुबंध खत्म हो गया था। तब से अस्पताल का संचालन परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के 38 पद स्वीकृत है। लेकिन वर्तमान में सीएमएस सहित कुल 14 डॉक्टर ही कार्यरत है। डॉक्टरों के 24 पद रिक्त चल रहे हैं। रेडियोलाजिस्ट की तैनाती न होने पर तात्कालीन डीएम डाॅ. सौरभ गहरवार रविवार को अस्पताल पहुंचकर अल्ट्रासाउंड कर लेते थे लेकिन तीन दिन पहले ही उनका स्थानांतरण होने से अल्ट्रासाउंड सेवा ठप हो गई है। सर्जन की तैनाती भी नहीं हो पाई है। लोगोंं को छोटे-छोटे ऑपरेशन करने के लिए देहरादून, ऋषिकेश की दौड़ लगानी पड़ रही है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने जिला अस्पताल की लचर स्वास्थ्य सेवाओं पर रोष जताया। कहा, सरकार का जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। कहा यदि जल्द ही जिला अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई तो कांग्रेस कार्यकर्ता आंदोलन धरना-प्रदर्शन करेंगे।
अस्पताल के सीएमएस डाॅ. अमित राय ने बताया कि स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर डॉक्टरों की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। एक सप्ताह में सर्जन की तैनाती होने की उम्मीद है।