नाबालिग बच्चों को उनकी मां के सुपुर्द करने को लेकर शुक्रवार को दिनभर खूब गहमा-गहमी रही। विभिन्न संगठनों की मांग पर डीएम की ओर से उचित कार्रवाई करने के निर्देश पर एसडीएम सदर और बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने जेल गए अब्बास सिद्धिकी के घर पहुंचकर बच्चों को लेकर एसडीएम कार्यालय लाए, वहां काउंसिलिंग के बाद बच्चों को फिर से पिता के घर भेज दिया गया। इस पर महिला सहित विभिन्न संगठन से जुड़े लोगों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए देर रात तक बाल संरक्षण कार्यालय में डटे रहे।
बृहस्पतिवार को अब्बास की पत्नी ने विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर डीएम को पत्र देकर नाबालिग बच्चे मां के सुपुर्द करने की मांग की थी। डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को एसडीएम पीआर चौहान बाल संरक्षण समिति के सदस्यों के साथ मयफोर्स अब्बास के घर पहुंचे और दोनों नाबालिग बच्चों को लेकर कार्यालय में लाकर काउंसिलिंग कराई गई, जिसके बाद बच्चों को फिर आरोपी के घर छोड़ दिया गया। जिससे बच्चों की मां और विभिन्न संगठन से जुड़े लोग देर बच्चे मां को सौंपने की मांग को लेकर बाल संरक्षण कार्यालय में डटे रहे। बावजूद समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया। इस बाबत जिला बाल संरक्षण अधिकारी अविनाश भदौरिया ने कहा कि यह मामला बाल संरक्षण समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, बच्चों की सुपुर्दगी के लिए महिला पारिवारिक न्यायालय में जा सकती हैं। उसके बाद भी महिला बच्चों को सुपुर्द करने की मांग पर समाचार लिखे जाने तक डटी हुई है। हिंदू जागरण मंच के प्रदेश मंत्री रघुवीर सिंह रावत, मुकेश आनंद, धीरेंद्र नेगी, अक्षत पवन बिजल्वाण, मनीष रावत और पवन शाह ने कहा कि बच्चे उनकी मां के सुपुर्द नहीं किए, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।