विस्थापन की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से कलक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे नंदगांव के चार लोग शुक्रवार से अनशन पर बैठ गए। प्रभावितों ने कहा कि चार साल से विस्थापन की मांग को लेकर आंदोलित हैं लेकिन अधिकारी प्रभावितों को कोरे आश्वासन ही दे रहे हैं।
पुनर्वास विभाग के अधिकारियों से ग्रामीणों से धरनास्थल पर वार्ता की, लेकिन वार्ता में कोई भी हल नहीं निकल पाया है। प्रभावितों से बिना विस्थापन के अनशन न तोड़ने की चेतावनी दी।
आंशिक डूब क्षेत्र संघर्ष समिति के बैनर तले नंदगांव के ग्रामीण 16 नवंबर से कलक्ट्रेट पर धरना पर बैठे थे। लेकिन विस्थापन की मांग पूरी न होने पर शुक्रवार को संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा, विक्रम सिंह, शैला देवी, रुसना देवी ने पुनर्वास निदेशालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष राणा ने कहा कि टिहरी बंाध की झील बनने के कारण प्रभावितों के खेत-खलियान जमींदोज हो चुके हैं। इससे ग्रामीणों को संकट से जूझना पड़ रहा है। लेकिन चार साल से प्रभावितों को विस्थापन के नाम पर झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं। अधिकारी भूमि की उपलब्धता न होने का बहाना बनाकर प्रभावितों को गुमराह कर रहे हैं। पुनर्वास के अधिशासी अभियंता डीके सिंह, एई गणेश भट्ट, राकेश थपलियाल और जाखणीधार की ब्लॉक प्रमुख बेवी असवाल की मध्यस्थता में ग्रामीणों से वार्ता की।
ईई ने बताया कि पुनर्वास के पास आवासीय भूखंड उपलब्ध है लेकिन कृषि भूखंड पर्याप्त न होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं। बताया कि जल्द ही इस संबंध में पुनर्वास निदेशक से वार्ता कर हल निकाल लिया जाएगा। बावजूद इसके ग्रामीण ईई के आश्वासन से सहमत नहीं हुए। दुर्गा सिंह, साका देवी, मंगसीरी देवी, गोमती देवी, रुकमणी देवी, बीरा देवी, मंजू देवी धरने पर बैठी रही।