ग्राम पंचायतों से रोजगार की मांग न आने और मनरेगा से जुड़े कर्मियों की लापरवाही से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का साधन माने जाने वाले मनरेगा योजना लक्ष्य से भटक रही है। इस वित्तीय वर्ष में अभी तक केवल 50 फीसदी मानव दिवस ही सृजित हो पाए हैं। ग्राम पंचायतों से समय पर रोजगार की डिमांड नहीं आ रही है। जिसके चलते जॉब कार्ड धारकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
जिले में मनरेगा में करीब डेढ़ लाख जॉब कार्ड धारक हैं। एक वर्ष में प्रत्येक कार्ड धारक को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार दिए जाने का प्राविधान है। ग्राम विकास विभाग ने समस्त जॉब कार्ड धारकों को वर्ष 2019-20 में 22 लाख 35 हजार 529 दिन (मानव दिवस) का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन 10 माह में केवल 12 लाख मानव दिवस ही सृजित हो पाए हैं। थौलधार में दो लाख 70 हजार एक सौ 97 में से केवल एक लाख एक हजार 15, प्रतापनगर में चार लाख 17 हजार तीन सौ 90 में से एक लाख 41 हजार एक सौ 77 दिन का लोगों को रोजगार मिल पाया है। भिलंगना में 62, चंबा 56, देवप्रयाग और जाखणीधार में 58-58 फीसदी तक लक्ष्य हासिल हो पाया है। अभी तक जिले का कुल 50 फीसदी लक्ष्य ही हासिल हो पाया है। ऐसे में वित्तीय वर्ष की समाप्ति के ढाई माह के अंदर अवशेष 50 फीसदी लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं है।
मनरेगा में डिमांड कम आ रही है। जनप्रतिनिधियों से लगातार डिमांड करने को कहा जा रहा है। कार्यक्रम अधिकारियों को रोजगार रजिस्ट्रर में भी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। रोजगार सहायक को साप्ताहिक लक्ष्य दिए गए हैं, जो लक्ष्य को हासिल नहीं करेंगेे।
-अभिषेक रूहेला, मुख्य विकास अधिकारी टिहरी।