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Iनगर पालिका के 11 वार्ड 24 किमी के दायरे में फैले हैं। पालिका क्षेत्र जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट से नई टिहरी, बौराड़ी, भागीरथी पुरम, मोकरी, खांडखाला होते हुए कोटीकॉलोनी तक है। पालिका क्षेत्र के अंतर्गत 27 किमी की आंतरिक सड़कें आती हैं। पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद के दावेदार अपने-अपने घोषणा और संकल्प पत्रों में पालिका क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के साथ विकास की नई योजनाओं को धरातल पर उतारने के बड़े-बड़े दावे कर रह हैं।
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Iबांध विस्थापित शहर नई टिहरी में बांध प्रभावितों के साथ ही पालिका क्षेत्र की कई मुख्य समस्याएं हैं। शहर में पर्यटन को आकर्षित करने के लिए किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं हैं। पालिका क्षेत्र के अंतर्गत नई टिहरी, बौराड़ी, भागीरथी पुरम और कोटीकॉलोनी में बड़े-छोटे बाजार आते हैं, लेकिन बाजारों में हाईटेक शौचालयों का अभाव बना है।I
Iनई टिहरी और बौराड़ी में एक-दो जगह शौचालय बने हैं। कूड़ाघर का कार्य मोकरी नामे तोक अभी तक आधा-अधूरा पड़ा है। शहर में बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के बैठने के लिए बने पार्क देखरेख और मरम्मत के अभाव में बदहाल हैं। कोटीकॉलोनी में बांध की झील के कारण पर्यटकों की आवाजाही होती है, लेकिन झील से कोटीकॉलोनी का बाजार अलग-थलग पड़ा होने के कारण व्यापारियों को पर्यटकों का लाभ नहीं मिल पाता है।I
Iपालिका क्षेत्र के ढुंगीधार और मुस्लिम मोहल्ला क्षेत्र 25 वर्षों बाद भी सीवेज सिस्टम से नहीं जोड़ पाया है। केमसारी और ढुंगीधार टिनशेडों में अस्थायी तौर पर रह रहे लगभग 250 से अधिक परिवारों को मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। पालिका क्षेत्र के लोग बांध की झील का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। इसके अलावा पालिका क्षेत्र की अंतर्गत आने वाली 27 किमी सड़कों की मरम्मत, सफाई, नालियों की मरम्मत सहित पालिका क्षेत्र में कई अन्य समस्याएं हैं।
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Iपालिका के पूर्व अध्यक्षों की ओर से नई टिहरी में पर्यटकों की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया है। समय-समय पर विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग पालिका क्षेत्र को लेकर मुखर रहते हैं। बावजूद समस्याएं कम नहीं हो पाई। चुनाव में अध्यक्ष पद के सात दावेदारों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी है। एक ओर वाहनों से चुनाव प्रचार जोरों पर हैं।I
Iदूसरी ओर प्रत्याशी घर-घर जाकर अपने लिए वोट मांग रहे हैं। अभी चुनाव में कुछ दिनों का समय शेष है। ऐसे में अध्यक्ष पद के दावेदार अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। दल या निर्दलीय जो भी प्रत्याशी चुनाव जीत कर अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होगा। उसके लिए समस्याओं से पार पाना आसान नहीं होगा।I