किसानों की आय बढ़ाने में राजकीय उद्यान मगरा मददगार साबित होगा। लंबे समय से वीरान पड़े मगरा उद्यान को उद्यान विभाग ने फिर से पुनर्जीवित किया है। मगरा उद्यान में बागवानी मिशन के अंतर्गत कीवी और अखरोट के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस वर्ष उद्यान विभाग ने मगरा उद्यान में आठ हजार कीवी और सात हजार अखरोट के पौधे तैयार किए हैं। उद्यान से कीवी और अखरोट के पौधे लेने के लिए काश्तकार 15 जुलाई तक उद्यान विभाग में आवेदन कर सकते हैं। कीवी के पौधे काश्तकारों को निशुल्क और अखरोट के पौधे बाजार दर से आधे दाम पर मुहैया कराए जाएंगे।
जौनपुर ब्लॉक के मगरा उद्यान में 1960 से उद्यान विभाग सेब, नाशपाती, आडू, पुलम की पैदावार करता आ रहा था। जलवायु परिवर्तन के कारण मगरा उद्यान में सेब, नाशपती और पुलम की पैदावार अब कम होने लगी थी। बंदर उद्यान विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। मगरा उद्यान के पेड़ों पर फल तैयार होते ही बंदरों का झुुंड फलों को चट कर रहे थे। ऐसी स्थिति में उद्यान विभाग के लिए मगरा उद्यान घाटे का सौदा बनता जा रहा था। घाटे की भरपाई के लिए उद्यान विभाग ने वर्ष 2020 में मगरा उद्यान में कीवी और अखरोट के पौध उगाने की योजना बनाई। कीवी और अखरोट को बंदर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। 44 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस उद्यान में 14 हेक्टेयर भूमि पर उद्यान विभाग ने आठ हजार कीवी और सात हजार अखरोट के पौधे तैयार किए हैं। जिला उद्यान अधिकारी डा. डीके तिवारी ने बताया कि पहले आओ, पहले पाओ सिद्धांत के तहत किसानों को पौधे दिए जाएंगे। कीवी के पौधे निशुल्क और अखरोट के पौधे आधे दाम पर मुहैया कराए जाएंगे।