संवाद न्यूज एजेंसी
नरेंद्रनगर (टिहरी)। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग की रेल परियोजना की टनल निर्माण के कारण लोयल में कुंड्या नामे तोक का प्राकृतिक जलस्रोत सूख गया है। इससे कुंड्या के ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण दस दिनों से बरसात का पानी एकत्र कर काम चला रहे हैं।
गांव की प्रधान देवेश्वरी देवी ने बताया कि कुंड्या नामे तोक में करीब 40 परिवार रहते हैं। उस तोक के लिए कुंड्या में स्थित प्राकृतिक जलस्रोत से पेयजल बनाई गई थी। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन की सुरंग में किए जा रहे बिस्फोट के कारण वह जल स्रोत सूख गया है। वहां पेयजल की अन्य कोई सुविधा नहीं होने से ग्रामीण पिछले 10 दिनों से बरसात के पानी के सहारे हैं। कहा कि सुरजकुंड-रानीताल पंपिंग पेयजल योजना से आपूर्ति कराने की मांग की गई है, लेकिन जल निगम ने अभी तक कोई सुध नहीं ली है।
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लोयल गांव के कुंड्या नामे तोक का जलस्रोत सूखने से ग्रामीणों की दिक्कतें बढ़ी है। कस्बे को सूरजकुंड-रानीताल पंपिंग पेयजल योजना से जोड़ कर सप्ताहभर में जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी। -प्रवीण शाह, ईई पेयजल निगम मुनिकीरेती।
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पेयजल स्रोत सूखने की आज ही सूचना मिली है। सोमवार को अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी। यदि समस्या हुई तो उसके समाधान के प्रयास होंगे।
-भूपेंद्र सिंह, डीजीएम, रेल विकास निगम