पेयजल योजना के बनने से क्षेत्र के कई गांवों को मिलना था पानी
नई टिहरी। प्रतापनगर क्षेत्र रौणद-रमोली के लिए बनने वाली जलकुर-बुरांशखंडा पेयजल योजना का कार्य वन भूमि के आड़े आने से अधर में लटक गई है जिसका खमियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। योजना के बनने से कई गावों को पानी दिया जाना था।
पट्टी रौणद-रमोली क्षेत्र के लिए 18 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली जलकुर-बुरांशखंड पेयजल योजना का निर्माण कार्य वर्ष 2022 शुरू किया था। योजना को 2025 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वन भूमि के विवाद के कारण योजना आधे में लटक गई। जिला पंचायत सदस्य शैला रमोला, प्रधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष सूरज चंद रमोला ने बताया कि पेयजल योजना पर आधे से अधिक कार्य हो गया है। 2800 मीटर लंबी इस पेयजल योजना की डेढ़ किलोमीटर लंबी मुख्य लाइन बिछाई जा चुकी है।
करीब एक किलोमीटर मीटर लाइन और निर्माण किया जाना है। योजना से क्षेत्र के भरपूर, ल्वारखा, सिलारी, कोरदी, गैरी ब्राह्मणों की भैंतला, खेतपाली सहित अन्य गांव और तोको में पानी दिया जाना है। वन भूमि की स्वीकृति को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और ग्रामीण शासन-प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। गर्मियों के मौसम में पेयजल स्रोतों पर पानी सूखने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामीणों के घरों में पानी के कनेक्शन पूर्व में लगा दिए गए है जो शोपीस बने हैं।
जलकुर-बुरांशखंड पेयजल योजना का कार्य वन भूमि की स्वीकृति न मिलने के कारण अटका हुआ है। योजना के लिए पर्याप्त मात्रा बजट भी नहीं मिला है। वन भूमि की अनुमति और बजट मिलने के बाद योजना का शेष कार्य शुरू किया जाएगा।
प्रशांत भारद्वाज, अधिशासी अभियंता जल संस्थान नई टिहरी।