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Tehri News: जल संस्थान के सामने 12.12 करोड़ की वसूली की चुनौती

Thu, 12 Feb 2026 07:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
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टिहरी बांध विस्थापित और सरकारी विभाग भी हैं बकाएदार
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नई टिहरी। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर जलकर देयकों की 12 करोड़ रुपये की वसूली करना जल संस्थान के लिए बड़ा लक्ष्य है। इसमें सरकारी विभाग से लेकर जिला मुख्यालय में निवासरत टिहरी बांध विस्थापित और अन्य घरेलू के साथ ही व्यवसायिक उपभोक्ता बकाएदार शामिल हैं। इस बार विलंब शुल्क की छूट नहीं मिलने के कारण लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। बावजूद कनेक्शन विच्छेद की समस्या से बचने के लिए जल संस्थान बकाया बिल जमा कराने के प्रयास में जुटा है।
जल संस्थान की नई टिहरी शाखा के सामने पानी के भारी-भरकम 12.12 करोड़ रुपये के बकाया बिलों की वसूली करना बड़ी चुनौती है। वर्ष 2024-25 की तरह इस बार अभी तक पुराने बिलों के विलंब शुल्क की शतप्रतिशत छूट नहीं मिलने के कारण उपभोक्ता भी असमंजस में है। बकायेदारों में सबसे अधिक घरेलू और व्यवसायिक उपभोक्ता हैं। उन पर 5.61 करोड़ का बकाया है।
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जबकि नई टिहरी में टिहरी बांध विस्थापित भी 3.53 करोड़ के बकायेदार हैं। सरकारी विभाग भी 2.97 करोड़ रुपये के बकाएदार हैं। जल संस्थान समय-समय पर विलंब शुल्क में छूट देता है लेकिन इस बार अभी तक छूट संबंधी को दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण विलंब शुल्क के साथ देयकों का शतप्रतिशत भुगतान करने में भी घरेलु उपभोक्ताओं के पसीने छूटने वाले हैं।


मार्च 2019 में मंत्रीमंडल ने टिहरी बांध प्रभावितों को पूर्व से लंबित जलकर और सीवर शुल्क के लंबित देयकों को माफ कर दिया था। योजना के रखरखाव और संचालन पर वर्ष 2006-07 से 2017-18 तक व्यय की गई धनराशि में से वसूली गई राशि के अलावा अवशेष धनराशि का भुगतान टीएचडीसी से भुगतान कराने के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया था जबकि विभाग को हुए नुकसान की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार ने देनी थी। भविष्य में जलकर और सीवर शुल्क की वसूली संंबंधी निर्णय के लिए मंत्रीमंडल की उप समिति गठित की गई थी लेकिन अभी तक समिति का निर्णय नहीं आ पाया है। इससे सभी बांध प्रभावित 2018 के बाद से बकायेदारों की श्रेणी में हैं।
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उपभोक्ताओं से जलकर के सभी देयकों का भुगतान करने की अपील जा रही है। इस बार अभी तक विलंब शुल्क की छूट संबंधी कोई आदेश नहीं आया है। टिहरी बांध विस्थापितों के संबंध में कोई निर्णय नहीं आया है। 2018 के बाद विस्थापित बकाएदारों की श्रेणी में चल रहे हैं।
- प्रशांत भारद्वाज, ईई जल संस्थान नई टिहरी।
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