घनसाली (टिहरी)। बूढ़ाकेदार में श्री गुरु कैलापीर देवता के तीन दिवसीय मेले का रविवार को आगाज हो गया। थाती-कठुड़ पट्टी के सैकड़ों लोगों ने गुरु कैलापीर देवता के निशाण के साथ पुंडारा के खेतों में सात चक्कर लगाकर क्षेत्र और परिवार की खुशहाली की कामना की।
भिलंगना क्षेत्र के स्थानीय लोग सुबह से ही कैलापीर मंदिर में दर्शनार्थ पहुंचने लगे थे। दोपहर को दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु ढोल-दमाऊं के साथ सीटी बजाते हुए मंदिर परिसर पहुंचे, जिससे वहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जमा हो गई। ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवता को विधि-विधान के साथ मंदिर से बाहर लाया गया।
देवता के पश्वा और निशाण निकटवर्ती पुंडारा के खेतों में पहुंचे। देवता के निशाण के साथ सैकड़ों लोगों ने पुंडारा के खेतों में देवता के झंडे के साथ चक्कर लगाने शुरू किए। सात चक्कर तक हर कोई देवता के निशाण के साथ खेतों में भागता रहा। पूरे चक्कर लगाने के बाद फरियादियों ने देवता को समस्याएं बताई।
इससे पहले विधायक शक्ति लाल शाह और डीएम मयूर दीक्षित ने मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पौराणिक परंपरा को जीवित रखने में क्षेत्र के लोगों का अहम योगदान है। विधायक ने कहा कि क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए शासन से बजट की स्वीकृति मिल गई। मंदिर समिति को गत वर्ष उन्होंने दस लाख देने की जो घोषणा की थी वह धनराशि दे दी गई है।
इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र नेगी, पुजारी विनोद सेमवाल, सुशील सेमवाल, सरोप सिंह राणा, धीरेंद्र नौटियाल, जय प्रकाश राणा, रामानुज बहुगुणा, हिम्मत सिंह रौतला, महेश रमोला, सतीश रतूड़ी आदि मौजूद रहे। शनिवार देर रात्रि तक बड़ी दीपावली पर लोगों ने पटाखे और भैले खेलकर बग्वाल को यादगार बनाया। ग्रामीणों ने 1001 भैले खेले। महिलाओं और बच्चों ने मेले में खरीदारी की। विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी विभागों की ओर से स्टाल भी लगाए गए हैं।
जौनपुर क्षेत्र के गांवों में धूमधाम से मनाई गई मंगसीर बग्वाल
जौनपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में मंगसीर की बग्वाल धूमधाम के साथ मनाई गई। विकासखंड के ग्राम खेड़ा, पापरा भुयासारी ठीक किशु बंगशील, मोलधार, तेवा, ओतड, डिगोन, मूगलोडी, मुनदणी, छनाण, क्यारी, लालोटना आदि गांवोें में बग्वाल की धूम रही। रात के लोगों ने गांवों में जमकर भैला खेला। पंचायती चौक में गांव के प्रत्येक परिवार से अक्षत फूल लाकर इसको अर्पण किया गया। यहां पर इस व्रत को नागराज देवता के रूप में पूजा जाता है।