नई टिहरी। गर्मियों में जंगलों को आग से बचाने के लिए चवालखेत में आयोजित गोष्ठी में वनकर्मियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। उसके बाद जंगल में लगी आग से कैसे निपटें इसके लिए मॉकड्रिल किया गया। बताया गया कि जंगल में आग लगने की स्थिति में पहले स्वयं की सुरक्षा करना सुनिश्चित करें। उसके बाद आग काबू करने का प्रयास करना चाहिए।
बुधवार को वन विभाग की ओर से बुडोगी के डांडा चवालखेत में वनाग्नि से निपटने की तैयारियों के लिए मॉकड्रिल किया गया। इससे पहले वन कर्मियों को बताया गया कि जंगल में अचानक कहीं आग लगने पर सबसे पहले खुद की सुरक्षा फिर साथ में काम करने वाले की सुरक्षा के बाद जन सुरक्षा करना है। उप प्रभागीय वनाधिकारी जन्मेजय चंद रमोला ने बताया कि 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर दी है।
जंगल की आग संबंधी सूचनाओं के लिए 52 क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक क्रू स्टेशन में चार फायर वाचर तैनात किए जा रहे हैं। फील्ड में मौजूद रहने वाले वन कर्मियों को वनाग्नि पर काबू करने के लिए जरूरी उपकरण हेलमेट, पंजा, पानी की बोतल, टार्च, रस्सी आदि प्रदान कर दिए हैं। इस मौके पर रेंजर आशीष डिमरी, जसवंत पंवार, प्रेमलाल डोभाल, अजयपाल पंवार, सतेंद्र सिंह, प्रवीन असवाल, होशियार सिंह, रीना भट्ट, रणवीर सिंह रावत, भगत सिंह रावत, विजय कुमार, दीपक, नरेंद्र सिंह, गोपी सिंह गुसाईं और विनोद आदि मौजूद थे।