जौनपुर ब्लॉक के सात गांव के काश्तकारों पर सिंचाई विभाग की लापरवाही भारी पड़ रही है। सिंचाई के लिए बनी नहर दो साल से क्षतिग्रस्त है, जिससे ग्रामीण धान और गेहूं की फसल का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से सिंचाई नहर की मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
सौड़ नामे सेरा में बांडासारी, पंतवाड़ी, नेग्याणा, कोड़ी, बिनाऊ, पवेच समेत सात गांवों की संयुक्त सिंचाई भूमि है। इस सेरा में ग्रामीण बड़ी मात्रा में गेहूं, धान आदि का उत्पादन करते थे, लेकिन दो साल से खेतों के सिंचाई के लिए बनी नहर कर हेड क्षतिग्रस्त है, जिससे ग्रामीण खेती नहीं कर पा रहे हैं। जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष सुभाष चंद रमोला, प्रधान सुरेश रावत, गिरीश रावत, अनिल रावत, अमित सजवाण, प्रीतम भंडारी, बलवीर रावत, राजेंद्र गौड़, हुकम भंडारी ने बताया कि सैकड़ों नाली वाले सौड़ नामे सेरा के लिए पंतवाड़ी गेदेरे से नहर जाती है। 200 मीटर में नहर जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से सिंचाई को पानी नहीं मिल रहा है। कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नहर पर पानी न आने से इस बार काश्तकार धान की रोपाई नहीं कर पाए। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर नहर की मरम्मत न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। इस बाबत सिंचाई विभाग के ईई केएस रावत ने कहा कि जल्द की नहर की मरम्मत की जाएगी।