जल संचय एवं जल संवर्द्धन को लेकर आयोजित बैठक में 15 सितंबर तक जल स्रोत, चाल, खाल संरक्षण कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया गया। बताया कि स्वजल, जल संस्थान, जल निगम, वन विभाग आपसी समन्वय बनाकर जल स्रोतों के आसपास सघन पौधरोपण कार्य करें।
विकास भवन में जिलाधिकारी वी षणमुगम की अध्यक्षता में आयोजित जल संचय की समीक्षा बैठक में विभागों ने प्रगति रिपोर्ट रखी। डीएम ने कहा कि सरकार ने जल संचय, जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता से करने को कहा है। ऐसे में जिन विभागों को जिम्मेदारी दी गई है, वह अपने कार्यों को तय समय पर पूरा कर जनहित में काम करें। डीएम ने जल संचय के लिए अधिकारियों से लेकर केवीके और औद्यानिकी विवि के विशेषज्ञों के साथ मिलकर जिलास्तर पर कमेटी बनाई जाए। मुख्य विकास अधिकारी ने जल संवर्द्धन को लेकर चल रहे कार्यों को 15 सितंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए। आजीविका परियोजना के प्रबंधक डा. एचबी पंत ने बताया कि जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए विभिन्न स्थानों पर छह-छह फीट तारबाड़ बनाई जा रही है। साथ ही जल संचय को 66 टैंक भी बनाए गए है। जल संस्थान के ईई व संचय के नोडल अधिकारी सतीश नौटियाल ने बताया कि जिले में 13 सौ लाख लीटर संचय का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस मौके पर डीएफओ डा. कोको रोसे, डीडीओ आनंद सिंह, पीडी डीआरडीए भरत भट्ट, जल निगम के ईई रकमपाल सिंह, लघु सिंचाई के अतुल पाठक आदि मौजूद थे।