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डीएम ने डीईओ बेसिक व माध्यमिक को किया बैठक से बाहर

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जिले के 18 आदर्श प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास बनाने में रुचि न दिखाने पर डीएम ने शिक्षा विभाग से धनराशि वापस मांग ली है। अब सीडीओ को स्मार्ट क्लास बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों की लचर कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए डीएम ने डीईओ बेसिक और डीईओ माध्यमिक को बैठक से बाहर कर दिया। स्मार्ट क्लास उपकरणों के लिए प्रत्येक विद्यालय को एक लाख 25 हजार की धनराशि निर्गत की गई है। एक माह के अंतर्गत ग्रामीण निर्माण विभाग स्कूलों में स्मार्ट क्लास संचालन के लिए लैपटॉप, प्रोजेक्टर आदि उपकरण क्रय कर मुहैया कराएगा।
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शिक्षा विभाग को स्मार्ट क्लास बनाने के लिए डीएम डा. वी षणमुगम ने जनवरी में अनटाइड फंड से 22 लाख 50 हजार की धनराशि मुहैया कराई थी। सोमवार को जिला सभागार में आयोजित बैठक में डा. षणमुगम ने शिक्षा विभाग की ओर से स्मार्ट क्लास बनाने के लिए कोई भी कार्रवाई न करने पर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि किन-किन स्कूलों में स्मार्ट क्लब बननी है एक माह में अधिकारी स्कूलों तक का चयन नहीं कर पाए। अधिकारियों की लचर कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए डीएम ने डीईओ बेसिक और डीईओ माध्यमिक को बैठक से बाहर भेज दिया। स्मार्ट क्लास के लिए दी गई 22 लाख 50 हजार की धनराशि का चेक विकास विभाग को सौंपने के निर्देश दिए।
डीएम ने सीडीओ अभिषेक रूहेला को निर्देश कि वह ग्रामीण निर्माण विभाग को धनराशि देकर स्मार्ट क्लास बनाए। डीएम ने कहा कि तकनीकी के प्रयोग से शिक्षा को रुचिकर और सरलीकृत बनाया जा सकता है। जल्द ही 18 स्कूलों को चयनित कर वहां स्मार्ट क्लास उपकरण लगाए जाए। जिले के प्रत्येक ब्लाक में दो-दो स्कूलों का स्मार्ट क्लास के लिए चयन किया जाए।
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