आजादी के बाद से छिलकों के सहारे राते काट रहे फड़वाली तोक के ग्रामीण अब रोजाना ही दिवाली मनाएंगे। इस बार की दीपावली का त्योहार ग्रामीणों के लिए जगमगाहट जो लेकर आई है। शनिवार को दीपावली के दिन गांव के घरों में पहली बार लाइट पहुंचने से ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े बजाकर खुशी का इजहार किया।
ढरसाल गांव के फड़वाली तोक के 10 अनुसूचित जाति के परिवार दशकों से अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर थे। इन ग्रामीणों के लिए 21वीं सदी में भी बिजली किसी सपने से कम नहीं थी। बिजली नहीं होने से ग्रामीण अंधेरा होते ही घरों में दुबकने को मजबूर हो जाते थे।
लाइट नहीं होने से ग्रामीण मोबाइल, फ्रीज, टीवी, प्रेस जैसी रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाले उपकरणों का भी प्रयोग नहीं कर पा रहे थे। खासतौर पर लाइट नहीं होने का खामियाजा स्कूली छात्रों को भुगतना पड़ता था। रात्रि के समय आसपास के गांवों में जगमगाहट देखकर ग्रामीण अपने बच्चों को जल्द लाइट आने की बात कहते थे।
बच्चों का भविष्य को देखते हुए ग्रामीण जगदंबा दास, भजन लाल, रमेश लाल, दिनेश लाल गांव में बिजली लाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। इसके लिए वह कई अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काट चुके थे। आखिरकार शनिवार को दीपावली के पर्व पर उनके घरों में बिजली पहुंची, तो ग्रामीणों का खुशी का ठिकाना न रहा।
ग्रामीणों ने मिठाई और ढोल नगाड़े बजाकर खुशी का इजहार किया। ग्रामीणों ने विद्युतीकरण के लिए ज्येष्ठ प्रमुख नरेंद्र चंद रमोला, पूर्व प्रधान रजनी भट्ट, शक्ति प्रसाद का आभार जताया।