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बॉर्डर पर पर्यटकों को रोकने के विरोध में बोट यूनियन का प्रदर्शन

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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण का असर फिर से बोट व्यवसाय पर भी पड़ने लगा है। सैलानी टिहरी झील में बोटिंग करने कम संख्या में पहुंच रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से झील किनारे बोट प्वाइंट पर सन्नाटा पसरा हुआ है। बॉर्डर पर पर्यटकों को कोरोना जांच के नाम पर जबरन रोकने के विरोध में मंगलवार को वोट यूनियन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन कर विरोध दर्ज किया। कहा कि कोविड जांच रिपोर्ट के नाम पर पर्यटकों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है, जिससे पर्यटकों को अपनी बुकिंग रद्द करानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से बोट संचालकों से प्रति वर्ष लिया जाने वाला लाइसेंस शुल्क न लेने और प्रति बोट क्षतिपूर्ति 10 हजार प्रतिमाह देने की मांग की है।
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गंगा भागीरथी वोट यूनियन के संरक्षक कुलदीप पंवार के नेतृत्व बोट संचालकों ने मंगलवार को कोटी कालोनी में प्रदर्शन किया। कहा कि कोरोना जांच सैंपल के नाम पर बॉर्डर पर जबरन पर्यटकों को रोका जा रहा है, जिससे पर्यटक बोटिंग करने टिहरी झील में नहीं पहुंच पा रहे हैं। कहा कि बंगाल चुनाव में लाखों लोगों की भीड़ जुट रही है। झील में पर्यटकों के न पहुंचने के कारण वे बैंक ऋण की किश्त जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कर्ज को बोझ बढ़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण की स्थिति सामान्य होने तक उन्होंने सरकार से प्रति वर्ष लिए जाने वाला लाइसेंस शुल्क न लेने और प्रतिमाह 10 हजार क्षतिपूर्ति प्रत्येक बोट संचालक को देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों नवीन सेमवाल, बीरू नेगी, मनोज रावत, कमलेश, मनीष नेगी, अजय राणा, प्रदीप पंवार, प्रवीण रावत, शैलेंद्र कांत, शीशपाल कठैत, भूपेंद्र राणा, रणबीर महर, दीपक पंवार, अनूप पंवार, पंकज बिष्ट उपस्थित रहे।
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