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बोट संचालकों का एक साल का पंजीकरण शुल्क माफ

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टिहरी झील में पर्यटन गतिविधियां संचालित करने वाले बोट संचालकों के लिए राहत भरी खबर है। कोरोना संक्रमण काल को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बोट संचालकों का एक साल का पंजीकरण शुल्क 60 हजार न लेने, बोट ऑपरेटरों को पांच-पांच हजार और टिहरी झील किनारे ठेली फड़ लगाने वालों को एक-एक हजार की आर्थिक सहायता राशि देने का निर्णय लिया है। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने यह जानकारी दी है।
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केदारनाथ के भ्रमण से लौटकर पर्यटन सचिव जावलकर सोमवार को नई टिहरी पहुंचे। उन्होंने पत्रकार वार्ता में बताया कि कोरोना संक्रमण से उत्तराखंड में पर्यटन, परिवहन और चारधाम यात्रा पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। कहा कि टिहरी झील को दुनिया का बेहतर साहसिक पर्यटन बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। स्थिति सामान्य होते ही झील के विकास की योजनाओं को शुरू किया जाएगा। इधर, श्री गंगा भागीरथी बोट यूनियन के अध्यक्ष लखवीर चौहान, सचिव जितेंद्र नेगी, संरक्षक कुलदीप पंवार ने बोट संचालकों का एक साल का पंजीकरण शुल्क माफ करने के निर्णय पर सरकार और डीएम का आभार जताया है। टिहरी झील में 99 बोटों का संचालन होता है। उन्होंने सरकार से बोट संचालकों का एडवांस में जमा पांच माह का रजिस्ट्रेशन शुल्क वापस करने की मांग की है।
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