नकदी फसलों को सड़क तक पहुंचाने के लिए काश्तकार घोड़े-खच्चरों पर हैं निर्भर
कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लॉक के मैंडखाल- रैदूणी-आबली से बागी तोक को जोड़ने वाली सड़क पर वन भूमि आड़े आने से दो दशक से तीन किमी सड़क नहीं बन पाई है। सड़क नहीं बनने से बागी तोक के काश्तकारों को घोड़ा-खच्चरों से सड़क तक नकदी फसलें पहुंचानी पड़ती है जिसका असर काश्तकारों की आजीविका पर पड़ता है।
राज्य आंदोलनकारी सबल सिंह चौहान, प्यार सिंह, दलबीर सिंह, शिव सिंह, चंदन सिंह चौहान, धन सिंह पंवार ने बताया कि धनोल्टी से खाद गांव के लिए वर्ष 2005 में 20 किमी सड़क का निर्माण किया गया था लेकिन दो दशक बीतने के बाद भी खाद से बागी तोक के लिए तीन किमी सड़क नहीं बन पाई।
बागी तोक में थौलधार ब्लॉक के रैदूणी, खाद, साबली, आबाली, बागी सहित कई गांवों के काश्तकारों की उपजाऊ भूमि है। काश्तकार बागी तोक में बड़ी मात्रा में नकदी फसलों का उत्पादन करते हैं लेकिन सड़क नहीं होने से काश्तकारों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता है। नकदी फसलों को सड़क तक पहुंचाने के लिए काश्तकारों को खोड़े-खच्चरों का सहारा लेना पड़ता है जिसका उन्हें तीन से चार सौ रुपये तक भाड़ा देने पड़ता है। इसके बाद ही नकदी फसलों को वाहन से देहरादून, मसूरी, चंबा आदि के लिए भेजा जाता है।
खाद से बागी तोक तक तीन किमी सड़क निर्माण की ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं लेकिन वन भूमि आने से सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसका खमियाजा क्षेत्र के काश्तकारों को उठाना पड़ता है। सड़क बनने से बनियाणधार, लुवारुधार तोक सहित अन्य गांवों को लाभ मिलेगा। ग्रामीणों का कहना कि जल्द सड़क निर्माण की स्वीकृति नहीं मिलती है तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे।
खाद से बागी तोक तक सड़क निर्माण न होने का मामला संज्ञान में नहीं है। किस कारण सड़क का मामला अटका हुआ है। इस बारे में विभागीय कर्मियों व अधिकारियों से जानकारी जुटाई जाएगी।
-लतिका उनियाल, रेंज अधिकारी, मसूरी वन प्रभाग।