विशेषज्ञ बोले, तकनीकी नवाचार से शोध और खेती में आएगा बदलाव
नई टिहरी। कृषि और वानिकी के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी के सहयोग से टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रो पावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी भागीरथीपुरम में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हो गई। पहले दिन विशेषज्ञों ने एआई के महत्व और तकनीकी सहयोग से आने वाले बदलावों की जानकारी दी।
कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ. शरद कुमार प्रधान, कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री रानीचौरी के अकादमिक निदेशक डॉ. अरविंद बिजल्वाण, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. सौरभ सिंह रावत ने संयुक्त रूप से किया। निदेशक डॉ. प्रधान ने कहा कि इंजीनियरिंग और एग्रो-फॉरेस्ट्री का समन्वय पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में अहम कदम है।
डॉ. बिजल्वाण ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य, संसाधनों की कमी और उत्पादन में असंतुलन जैसी समस्याओं से निपटने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कारगर भूमिका निभा सकती है। उन्होंने छात्रों से शोध और तकनीक को किसानों की समस्याओं से जोड़ने की अपील की। एआई विभाग के सहायक प्राध्यापक मुदित मित्तल ने एआई की मूलभूत अवधारणाओं और पर्यावरण संरक्षण में इसके उपयोग की जानकारी दी।
फैकल्टी कोऑर्डिनेटर डॉ. कविता तड़ियाल ने कहा कि दोनों कैंपस मिलकर शोध और तकनीकी नवाचार में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। छात्र संयोजक गौरी पंवार, अक्षत केस्तवाल ने एआई क्लब की आगामी गतिविधियों की जानकारी दी। छात्रा सान्वी घिल्डियाल, आयुष कलूरा ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों को नई दिशा देते हैं और शोध को प्रेरित करते हैं।