चंबा (टिहरी)। एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में भू-पर्यावरणीय आपदाएं और नव निवर्तनिकी विषय पर कार्यशाला चल रही है, जिसमें वैज्ञानिकों ने भूस्खलन, भूकंप, ग्लोबल वार्मिंग, फ्लड की बढ़ती घटनाओं के पीछे अनियोजित विकास को बताया।
परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला ने कहा कि रेडोन गैस की मदद से जमीन के अंदर होने वाली हलचलों को भांपा जा सकता है। भूकंप के सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए रेडोन के साथ ही हीलियम, कार्बन डाई आक्साइड, भूमि की प्रतिरोधकता, पृथ्वी की चालकता और पृथ्वी की संरचना में बदलावों का अध्ययन किया जाना भी जरूरी है। भू-वैज्ञानिक प्रो. शिव प्रसाद ने कहा कि उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाऐं निरंतर बढ़ रही हैं। यह घटनाएं अधिकांशत: उस स्थान पर होती हैं, जहां चीड़ के पेड़ अधिक होते हैं। डा. डीएस बागड़ी ने कहा कि आपदा को कम करने के लिए भवन निर्माण के लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। इंद्रप्रस्थ विवि दिल्ली के डा. किरनमय शर्मा ने अपने शोध में बताया कि दिल्ली के आबादी वाले क्षेत्रों में ग्राउंड वाटर लेवल में कमी और पानी की गुणवत्ता में गिरावट आना शुभ लक्षण नहीं है। इस मौके पर प्रो. डीएस कैंतुरा, डा. अर्चना शाह, डा. केसी पेटवाल, डा. आरबी गोदियाल, डा. जेडीएस नेगी, डा. केके बंगवाल, डा. एबी थपलियाल, राकेश कोठारी आदि उपस्थित थे।