एएनएम सेंटर खोलने का सपना वर्षों बाद भी नहीं हो पा रहा साकार
नई टिहरी। टिहरी जिले के सीमांत गेंवाली, उरणी और पिनस्वाड़ गांव के लोगों का एएनएम सेंटर खोलने का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। बुखार या सिरदर्द की मामूली दवा के लिए भी गांव वालों को 30 किमी दूर बूढ़ाकेदार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है, लेकिन असली संकट तब खड़ा होता है जब गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को टीकाकरण के लिए इस लंबे, दुर्गम और जोखिम भरे सफर से गुजरना पड़ता है।
भिलंगना ब्लॉक के गेंवाली, उरणी और पिनस्वाड़ गांव आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र में आते हैं। हर साल बारिश और बर्फबारी के दौरान उक्त तीनों गांव महीनों तक बाकी दुनिया से कट जाते हैं। ऐसे में अगर किसी महिला को प्रसव पीड़ा होती है या किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ जाती है, तो उनका भगवान ही मालिक होता है।
पिनस्वाड़ के पूर्व प्रधान धर्म सिंह जखेड़ी, भरत सिंह नेगी और गेंवाली के कुंदन सिंह का कहना है कि अगर सरकार ने सीमांत गांवों की दुर्गम परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखा, तो यहां के सभी लोग पलायन के लिए मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि गांव के लोग एएनएम सेंटर के लिए स्वास्थ्य विभाग को अपनी जमीन मुफ्त देने को तैयार हैं। ग्राम सभा ने पूर्व में इस संबंध में प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन शासन ने कम जनसंख्या का मानक बताकर इसे ठुकरा दिया। तीनों गांवों की कुल जनसंख्या लगभग 1500 है, जबकि एएनएम सेंटर खोलने के लिए सरकार की शर्त 5000 की आबादी की है।
बताया कि हर साल बारिश और बर्फबारी में सड़क मार्ग महीनों तक बंद रहता है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। सरकार को यहां एएनएम सेंटर खोलने के मानकों में छूट देनी चाहिए। ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
गेंवाली, उरणी और पिनस्वाड़ गांव की विकट समस्या को देखते हुए पिनस्वाड़ में एएनएम सेंटर खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। वहां गांवोें में जनसंख्या कम होने से एएनएम सेंटर खोलने में दिक्कत हो रही है। लोगों की समस्या को देखते हुए हर माह अंतिम शनिवार को वहां स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है।
-डाॅ. श्याम विजय, सीएमओ टिहरी