श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध कॉलेजों की बीएड परीक्षा कार्यक्रम पर दुविधा बरकरार बनी हुई है। तीन माह से 2500 छात्र-छात्राएं परीक्षा कार्यक्रम के इंतजार में घर पर हैं। लेकिन विवि प्रशासन और कॉलेजों की लचर प्रशासनिक व्यवस्था के चलते अब मामला शासन स्तर पर पहुंच चुका है। परीक्षा कब होगी और मेरिट से कम अंक वाले छात्र-छात्राएं क्या परीक्षा में बैठ पाएंगे विवि प्रशासन को इस मामले में अब शासन की गाईड लाइन का इंतजार है।
श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध 27 बीएड कॉलेजों ने सत्र 2013-14 में छात्र-छात्राओं से मोटी रकम लेकर मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर कम मेरिट होने पर भी प्रवेश दे दिया था। सितंबर माह में स्ववित्त पोषित बीएड कॉलेजों ने विवि को छात्रों की शुल्क रसीद और छात्र संख्या का विवरण उपलब्ध नहीं तो विवि ने उनकी मान्यता रद्द करने का नोटिस जारी किया। विवि की ओर से 30 अक्तूबर को मान्यता रद्द करने का अंतिम चेतावनी नोटिस जारी होने पर कॉलेजों ने नवंबर माह में परीक्षा फार्म जमा कराए।
कॉलेजों ने विवि में जो परीक्षा फार्म, शुल्क रसीद और प्रवेश परीक्षा की अंक तालिका उपलब्ध कराई उसे देखकर विवि का माथा ठनक गया। शुल्क रसीद और प्रवेश अंकों में कई विसंगतियां होने के कारण विवि प्रशासन ने कमेटी से परीक्षा फार्मो की स्कू टनी कराई। स्क्रूटनी कमेटी ने एक जनवरी को अपनी रिपोर्ट शासन स्तर पर कमेटी शुल्क नियामक एवं विनियोग आयोग को भेज दी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि छात्रों को नियम विरूद्व प्रवेश देने के मामले में निजी कॉलेज और छात्र स्वयं जिम्मेदार होंगे। विवि के कुलसचिव डा.एसएस रावत का कहना है कि बीएड परीक्षा कार्यक्रम के संबंध में शासन की गाईड लाइन प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।