कुंजणी और धारअकरिया पट्टी के दर्जनों गांव की प्यास बुझाने वाली महत्वकांक्षी घंटाकर्ण पंपिंग पेयजल योजना परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही है। पिछले कई माह से योजना का कार्य ठप होने के कारण आधी-अधूरी पेयजल लाइनें जंक खाने लगी हैं, जबकि मजदूरी न मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने जल्द भुगतान न होने पर पाइप लाइन उखाड़ने की चेतावनी दी है।
विकासखण्ड चंबा और नरेंद्रनगर के गजा, नकोट, स्वीर, मौण, जयकोट, कोटी सहित दर्जनों गांवों में पेयजल की किल्लत बनी रहती है। क्षेत्र की करीब 40 हजार आबादी को सर्दियों के मौसम में भी पानी के संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए 2013 में 45 करोड़ लागत की घंटाकर्ण पंपिंग पेयजल योजना स्वीकृत होकर काम शुरू हुआ था, जिस पर योजना को धरातल पर लाने के लिए पेयजल निगम चंबा को शुरूआती दौर में 27 करोड़ रुपये मिले।
विभाग ने पाइप लाइन और वाटर टैंक आदि का काम किया, लेकिन इसके बाद शासन की ओर से बकाया 18 करोड़ रुपये निगम को नहीं मिल पाए। बजट न मिलने से नौ माह से पेयजल योजना का निर्माण कार्य पर ठप पड़ा हुआ है। घरों तक पानी की सप्लाई लाइन समेत कई कार्य अधर में लटके हुए हैं। बिछी हुई पाइप लाइनें और पंप हाउस जंक खाने लगा है।
जिला पंचायत सदस्य अनिल भंडारी, धर्म सिंह मंद्रवाल, रमेश सिंह का कहना है कि निर्माण कार्य रुक जाने के कारण पाइप सड़कों पर खराब हो रहे हैं। जो पाइप बिछ चुके हैं, वे भी खराब हो रहे हैं। साथ ही पेयजल योजना के निर्माण में काम करने वाले ग्रामीणों को मजदूरी भुगतान भी नहीं हुआ है।
इनका यह है कहना-
पेयजल योजना का कार्य पैसा न मिलने के कारण पूरा नहीं हो पाया है। उच्चाधिकारियों को धन की कमी से अवगत कराया जा चुका है। पैसा मिलते ही योजना को अविलंब पूरा कर दिया जाएगा।
-आलोक कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम चंबा।